रुद्रप्रयाग में बादल फटने से तबाही: बसुकेदार क्षेत्र में मलबा गिरा, कई लोग लापता, प्रशासन अलर्ट पर
रुद्रप्रयाग में बादल फटने से तबाही: बसुकेदार क्षेत्र में मलबा गिरा, कई लोग लापता, प्रशासन अलर्ट पर
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के तहसील बसुकेदार अंतर्गत बड़ेथ डुंगर तोक क्षेत्र में गुरुवार देर रात बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचा दी। अचानक मलबा और पानी के सैलाब से कई क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, जिसमें घरों, सड़कों और वाहनों को नुकसान पहुंचा है। जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिए हैं, जबकि कुछ इलाकों में लोगों के लापता होने की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है। यह घटना मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते आपदा जोखिम को उजागर करती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन लगातार आपदा कंट्रोल रूम से अधिकारियों के संपर्क में हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में जिला स्तरीय अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की है और बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सभी जिलास्तरीय अधिकारी जिला आपदा कंट्रोल रूम में समन्वय के साथ कार्यरत हैं। एनएच, पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई की टीमें रास्ते खोलने में जुटी हुई हैं, जबकि वैकल्पिक मार्गों का चिन्हांकन कर राहत दलों को भेजा जा रहा है। जिला स्तर से राजस्व निरीक्षक और अन्य कार्मिकों को प्रभावित ग्रामों में तैनात किया गया है।
प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, स्यूर में एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया और एक बोलेरो वाहन बह गया। बड़ेथ, बगडधार और तालजामनी गांव के गदेरों में पानी व मलबा आने से भारी नुकसान हुआ। किमाणा में खेती की भूमि, सड़क पर बड़े बोल्डर और मलबा गिरा, जबकि अरखुण्ड में मछली तालाब एवं मुर्गी फार्म बह गए। छेनागाड़ बाजार में मलबा भर गया और कई वाहन बहने की खबर है। सबसे चिंताजनक छेनागाड़ डुगर गांव और जौला बड़ेथ में कुछ लोगों के गुमशुदा होने की सूचना प्राप्त हो रही है।
जिला प्रशासन प्रभावितों को त्वरित सहायता प्रदान करने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सक्रिय है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस एवं राजस्व विभाग की टीमें राहत व बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया पर घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन राहत कार्य तेज कर रहा है और आपदा सचिव व जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। विपक्षी दलों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे भविष्य में और सतर्कता जरूरी है। राहत कार्य जारी हैं, और अपडेट का इंतजार है।
