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IMF में भारत के पूर्व RBI गवर्नर उर्जित पटेल को मिली बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के पद पर नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2025 को इसकी घोषणा की, जो तीन वर्ष के लिए प्रभावी होगी। यह नियुक्ति डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम की जगह की जा रही है, जिनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था। पटेल की यह नई भूमिका भारत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के देशों का प्रतिनिधित्व करेगी, जहां वे IMF के बोर्ड में वैश्विक आर्थिक नीतियों, वित्तीय स्थिरता और विकासशील देशों की चुनौतियों पर योगदान देंगे।

डॉ. उर्जित पटेल का जन्म 1963 में केन्या के नैरोबी में हुआ था। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीएससी, ऑक्सफोर्ड से एमफिल और येल यूनिवर्सिटी से पीएचडी प्राप्त की। 1990 में IMF में शामिल होने के बाद, वे 1995 तक अमेरिका, भारत, बहामास और म्यांमार डेस्क पर कार्यरत रहे। उसके बाद IMF की ओर से RBI में डेपुटेशन पर आए, जहां उन्होंने डेट मार्केट, बैंकिंग सुधारों और पेंशन फंड्स पर सलाह दी। 2013-2016 तक RBI के डिप्टी गवर्नर रहे, जहां उन्होंने मौद्रिक नीति विभाग का नेतृत्व किया। 2014 में गठित उर्जित पटेल समिति की रिपोर्ट ने भारत की मौद्रिक नीति में क्रांतिकारी बदलाव लाए, जिसमें 4% CPI मुद्रास्फीति लक्ष्य को अपनाया गया। सितंबर 2016 से दिसंबर 2018 तक वे RBI के 24वें गवर्नर रहे, लेकिन व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया। इस दौरान उन्होंने डेमोक्रेटाइजेशन और जीएसटी जैसे आर्थिक परिवर्तनों का सामना किया। इस्तीफे के पीछे सरकार से नीतिगत मतभेद की अटकलें लगीं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उनके योगदान की सराहना की।

पटेल की करियर यात्रा IMF से शुरू होकर RBI, रिलायंस इंडस्ट्रीज (बिजनेस डेवलपमेंट प्रेसिडेंट), बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप, गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) में वाइस प्रेसिडेंट तक फैली हुई है। 2020 में वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) के चेयरमैन बने। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में नॉन-रेजिडेंट सीनियर फेलो के रूप में भी सक्रिय रहे। उनकी विशेषज्ञता मौद्रिक नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस और आर्थिक नीतियों में है।

यह नियुक्ति भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को मजबूत करेगी। IMF के कार्यकारी निदेशक के रूप में पटेल विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज बुलंद करेंगे, खासकर मुद्रास्फीति नियंत्रण, वित्तीय स्थिरता और सतत विकास पर। विशेषज्ञों का मानना है कि पटेल का अनुभव वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, डिजिटल करेंसी और व्यापार युद्धों से निपटने में सहायक साबित होगा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा लिया गया है, और पटेल चार्ज संभालने की तारीख से पदभार ग्रहण करेंगे। विपक्ष ने नियुक्ति का स्वागत किया, लेकिन कुछ ने RBI कार्यकाल के दौरान के मुद्दों पर सवाल उठाए। पटेल की वापसी IMF में उनके करियर को पूर्णता प्रदान करती है, जो 30 वर्षों की यात्रा का प्रतीक है। आने वाले समय में उनकी भूमिका भारत की आर्थिक कूटनीति को नई दिशा देगी।

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