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उत्तराखंड में आफत की बारिश : केदारघाटी का पुल बहा, अलकनंदा उफान पर

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। चमोली जिले में बादल फटने से भारी तबाही मच गई है। केदारघाटी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पुल बह गया, जबकि रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर चढ़ गया है। इस घटना में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 अन्य लापता बताए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, लेकिन भारी वर्षा के कारण चुनौतियां बढ़ रही हैं।

घटना गुरुवार सुबह चमोली के सुदूरवर्ती इलाके में हुई, जहां अचानक बादल फटने से तेज धारा बहने लगी। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित एक प्रमुख पुल ध्वस्त हो गया, जिससे सैकड़ों यात्री और स्थानीय निवासी फंस गए हैं। चमोली जिला प्रशासन के अनुसार, भूस्खलन से कई गांव कट गए हैं, और राष्ट्रीय राजमार्ग 7 पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी उफान पर है, जो खतरे के स्तर 180 मीटर से 10 मीटर ऊपर पहुंच चुकी है। नदी के किनारे बसे घरों और दुकानों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि कई वाहन बह गए। आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंची हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर ऑपरेशन प्रभावित हो रहा है।

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जून से अब तक राज्य में वर्षा संबंधी घटनाओं से 200 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग सबसे प्रभावित जिले हैं, जहां 50 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल राहत के लिए 50 करोड़ रुपये की घोषणा की है और केंद्र सरकार से सहायता की मांग की है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता प्रभावितों की जान बचाना और पुनर्वास है।” विपक्षी दलों ने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए हैं, जबकि विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को इसका प्रमुख कारण बताया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ की चेतावनी समय पर नहीं दी गई, जिससे नुकसान बढ़ा। एनडीआरएफ ने 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है। आने वाले दिनों में वर्षा जारी रहने की आशंका है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। यह घटना पहाड़ी राज्यों में बुनियादी ढांचे की मजबूती पर सवाल खड़े कर रही है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राहत प्रयासों को तेज कर रही हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता की जरूरत है।

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