राष्ट्रीय

अमेरिकी टैरिफ का झटका: शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी गिरा

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ के असर ने मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह झकझोर दिया। ट्रेड वॉर के डर से निवेशकों में भय का माहौल फैल गया, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 849 अंक टूटकर 80,623.26 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 21.95 अंक गिरकर 24,596.15 पर समाप्त हुआ। यह गिरावट निर्यात-निर्भर क्षेत्रों जैसे आईटी, ऑटो, टेक्सटाइल और ज्वेलरी पर सबसे ज्यादा पड़ी, जहां बड़े स्टॉक्स धड़ाम से लुढ़क गए। बाजार पूरे दिन लाल निशान में रहा, और क्लोजिंग तक कोई राहत न मिली।

ट्रंप ने 7 अगस्त को 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, जो भारत की अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च टैरिफ का जवाब था। लेकिन रूस से तेल आयात को लेकर 6 अगस्त को साइन किए गए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत आज (26 अगस्त) से अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू हो गया, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया। यह कदम भारत के $87 बिलियन के अमेरिकी निर्यात को सीधे निशाना बना रहा है, जो जीडीपी का 2.5% हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह टैरिफ टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, चमड़ा, केमिकल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित करेगा। फार्मा और सेमीकंडक्टर को फिलहाल छूट मिली है, लेकिन सेकंडरी इफेक्ट्स से बाजार में डर फैल गया।

बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही, जहां सेंसेक्स 300 अंक गिरकर खुला। दिन भर में यह 79,811 तक लुढ़क गया, लेकिन आखिरी घंटे में खरीदारी से थोड़ी रिकवरी हुई। निफ्टी भी 0.09% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5% तक नीचे रहे। प्रमुख स्टॉक्स में TCS 9% गिरा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा 5-6% लुढ़के, जबकि रिलायंस और HDFC बैंक जैसे ब्लूचिप्स में 2-3% की कमी आई। आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा, क्योंकि अमेरिका भारत के आईटी एक्सपोर्ट का बड़ा बाजार है। ऑटो सेक्टर में टैरिफ से सप्लाई चेन बाधित होने का डर है। कुल मिलाकर, बाजार पूंजीकरण में ₹14.2 लाख करोड़ का नुकसान हुआ, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट में से एक है।

विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा, जहां कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमेरिकी वस्तुओं पर 50% जवाबी टैरिफ लगाने की मांग की। उन्होंने कहा, “ट्रंप का यह आर्थिक ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” दूसरी ओर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत कूटनीतिक बातचीत से समाधान निकालेगा और WTO में चुनौती दे सकता है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यह टैरिफ जीडीपी ग्रोथ को 0.2-0.5% कम कर सकता है, लेकिन घरेलू मांग और वैकल्पिक बाजारों (जैसे यूरोप, ASEAN) से कुछ राहत मिल सकती है। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि भारत की ग्रोथ पर सीमित असर पड़ेगा, क्योंकि अर्थव्यवस्था ट्रेड-ओरिएंटेड कम है।

रुपया भी 3 पैसे गिरकर 87.69 पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में भी हलचल है, जहां डाउ जोन्स और नैस्डैक में भी गिरावट देखी गई। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखें और लॉन्ग-टर्म पर फोकस करें। अगले 21 दिनों में भारत-अमेरिका ट्रेड डील की संभावना से बाजार में रिकवरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *