Monday, October 26, 2026
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अब 100% एथेनॉल से चल सकेंगी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां, केंद्र ने बदले मोटर वाहन नियम

अब 100% एथेनॉल से चल सकेंगी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां, केंद्र ने बदले मोटर वाहन नियम

केंद्र सरकार ने एथेनॉल आधारित हरित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 26 अक्टूबर से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 100 प्रतिशत एथेनॉल यानी ई100 ईंधन से जुड़े नए उत्सर्जन और ईंधन मानक लागू हो गए हैं। इस बदलाव से उन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में शुद्ध एथेनॉल के इस्तेमाल का रास्ता साफ होगा, जिन्हें निर्माता विशेष रूप से इस ईंधन के अनुकूल डिजाइन करेंगे।

ई85 के साथ ई100 को भी नियमों में शामिल किया

संशोधित नियमों के तहत विभिन्न उत्सर्जन मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं में पहले इस्तेमाल किए गए ई85 ईंधन के संदर्भों को बदलकर ई85 या ई100 कर दिया गया है। ई85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है, जबकि ई100 को 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के रूप में संदर्भित किया जाता है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई85 या ई100 का इस्तेमाल केवल उन्हीं फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) इन ईंधनों के अनुकूल बनाकर तैयार करेंगे। यानी यह बदलाव सभी मौजूदा पेट्रोल वाहनों में सीधे 100 प्रतिशत एथेनॉल इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता। वाहन का डिजाइन और संबंधित तकनीकी मानक इस मामले में अहम होंगे।

उत्सर्जन और ईंधन मानकों में भी बदलाव

मोटर वाहन नियमों में किए गए संशोधनों में कुछ वाहन श्रेणियों और तकनीकी मानकों को भी बदला गया है। एक उत्सर्जन तालिका में सकल वाहन भार की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है।

इसके अलावा हाइड्रोजन-कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (एचसीएनजी), 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20), बायोडीजल मानकों और उत्सर्जन परीक्षण से संबंधित तकनीकी प्रावधानों में भी संशोधन किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल से जुड़े नियामकीय ढांचे को अद्यतन करना है।

नितिन गडकरी ने एथेनॉल की लागत को लेकर क्या कहा था?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि यदि वाहन पूरी तरह एथेनॉल पर चलें, तो ईंधन की लागत पेट्रोल के करीब 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि दुनिया के 19 देशों में एथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है और भारत में भी इससे चलने वाले वाहनों को लेकर अब तक कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है।

हालांकि, वास्तविक लागत वाहन की तकनीक, एथेनॉल की उपलब्धता, स्थानीय कीमतों और ईंधन की खपत जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। इसलिए एथेनॉल से चलने वाले वाहनों की परिचालन लागत का आकलन करते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

ई25 मिश्रण होने पर 17.9 अरब लीटर तक पहुंच सकती है मांग

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत वित्त वर्ष 2030-31 तक पेट्रोल में 25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी ई25 का लक्ष्य हासिल करता है, तो एथेनॉल की मांग बढ़कर 17.9 अरब लीटर तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में फिलहाल 18.25 अरब लीटर की स्थापित डिस्टिलेशन क्षमता मौजूद है, जो अनुमानित ई25 मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो सकती है। वहीं, यदि एथेनॉल मिश्रण का स्तर ई20 पर बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2030-31 तक मांग लगभग 14.3 अरब लीटर रहने का अनुमान है। इस स्थिति में मौजूदा स्थापित क्षमता का करीब 78 प्रतिशत इस्तेमाल होगा।

हरित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ई100 से जुड़े मानकों को शामिल करना भारत में वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव है। इससे वाहन निर्माताओं को एथेनॉल के अधिक अनुपात वाले ईंधन के अनुकूल वाहन विकसित करने के लिए स्पष्ट मानक मिलेंगे।

हालांकि, ई100 ईंधन का व्यापक इस्तेमाल केवल नियमों में बदलाव से तय नहीं होगा। इसके लिए उपयुक्त वाहनों की उपलब्धता, ईंधन आपूर्ति व्यवस्था, वितरण नेटवर्क और उपभोक्ताओं के लिए इसकी आर्थिक व्यवहार्यता भी महत्वपूर्ण होगी।

 

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