Tuesday, October 27, 2026
Latest:
राजनीति

तमिलनाडु: 100 करोड़ के निजी स्कूल घोटाला मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री अंबिल महेश गिरफ्तार, मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज

तमिलनाडु: 100 करोड़ के निजी स्कूल घोटाला मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री अंबिल महेश गिरफ्तार, मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज

​तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। ग्रेटर चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने सोमवार को राज्य के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ नेता अंबिल महेश (Anbil Mahesh) को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा कथित 100 करोड़ रुपये के निजी स्कूल भ्रष्टाचार मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका और गिरफ्तारी से राहत की अर्जी खारिज किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई।

​पुलिस ने महेश को चेन्नई के अमीनजिकराई स्थित एक अपार्टमेंट से हिरासत में लिया।

​1. क्या है 100 करोड़ रुपये का रिश्वत/भ्रष्टाचार मामला?

​सरकारी मंजूरी के बदले रकम: मामला डीएमके (DMK) सरकार के उस कार्यकाल का है जब अंबिल महेश स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री थे। आरोप है कि निजी स्कूलों को सरकारी मंजूरियां दिलाने के नाम पर स्कूल प्रबंधनों से रिश्वत ली गई।

​177 निजी स्कूल जांच के घेरे में: जांच एजेंसी के अनुसार, कम से कम 100 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन के सिलसिले में 177 निजी स्कूलों की पहचान की गई है।

​पार्टी फंड के नाम पर वसूली: जांचकर्ताओं का दावा है कि यह पैसा ‘पार्टी फंड’ के नाम पर एकत्र किया गया था और स्कूलों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), लाइसेंस नवीनीकरण, मान्यता (Recognition), और नगर व ग्रामीण योजना निदेशालय (DTCP) से अनिवार्य स्वीकृतियां तुरंत दिलाने का झूठा आश्वासन दिया गया था।

​2. शिकायतकर्ता और एफआईआर (FIR) की पृष्ठभूमि:

​किसने दर्ज कराया मामला: यह कार्रवाई ‘तमिलनाडु में निजी स्कूलों के संघों के महासंघ’ के सचिव डीसी एलंगोवन की शिकायत के आधार पर शुरू हुई है।

​शुरुआती आरोपी: एलंगोवन ने आरोप लगाया था कि तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीटी अरसुकुमार और अन्य पदाधिकारियों ने स्कूल प्रबंधनों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए, लेकिन पैसे लेने के बावजूद मंजूरियां नहीं दिलवाईं।

​3. कानून की धाराएं और पूर्व मंत्री का नाम जुड़ना:

​शुरुआती धाराएं: पुलिस ने शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और 318(4) के तहत आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) और धोखाधड़ी (Cheating) का मामला दर्ज किया था।

​भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लागू: जांच आगे बढ़ने पर अभियोजन पक्ष ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष संशोधन रिपोर्ट दायर की और मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 और 12 जोड़ी। इसके साथ ही पूर्व मंत्री अंबिल महेश को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया।

​4. मद्रास हाईकोर्ट का फैसला:

​मामले में नामजद किए जाने के बाद अंबिल महेश ने एफआईआर रद्द कराने और गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। हालांकि, जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने सोमवार को मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके तुरंत बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *