सर्वपितृ अमावस्या 2026, जानें शुभ मुहूर्त, तर्पण विधि और दान का महत्व
सर्वपितृ अमावस्या 2026, जानें शुभ मुहूर्त, तर्पण विधि और दान का महत्व
आज शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या है, जिसे महालय अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन है, जो पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इसी दिन के समापन के साथ पितृ पक्ष का समापन होता है और इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है।
सर्वपितृ अमावस्या से जुड़ी मुख्य बातें और नियम:
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व: जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जो पूरे पितृ पक्ष के दौरान किसी कारणवश श्राद्ध-तर्पण नहीं कर पाते, वे इस दिन विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
श्राद्ध और तर्पण के लिए आज के शुभ मुहूर्त:
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:41 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:28 बजे से दोपहर 3:49 बजे तक
पूजा और तर्पण की विधि: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। तांबे के पात्र में जल, काले तिल और कुश लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए तर्पण करें। इसके बाद पके हुए चावल और तिल से पिंडदान करें। ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराना और गाय, कुत्ते, कौवे व चींटियों के लिए भोजन निकालना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
दान का महत्व: इस दिन अन्न दान (अनाज या भोजन), काले तिल, वस्त्र, घी और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान करना बहुत शुभ फलदायी होता है। दान का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता करना और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना है।

