नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पुरस्कार समिति और संयुक्त राष्ट्र पर साधा निशाना
नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पुरस्कार समिति और संयुक्त राष्ट्र पर साधा निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की घोषणा के बाद नोबेल चयन समिति की कड़ी आलोचना की है। शुक्रवार को न्यू यॉर्क के सिरैक्यूज में आयोजित एक रिपब्लिकन चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आठ अलग-अलग संघर्षों को खत्म कराने में उनके योगदान के बावजूद अमेरिका को इस पुरस्कार से वंचित रखना “शर्मनाक” और “अन्यायपूर्ण” है।
गौरतलब है कि नार्वे की नोबेल समिति ने वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख और दक्षिण अफ्रीकी मूल की jurist नावी पिल्ले (Navi Pillay) को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान और दावों से जुड़ी मुख्य बातें:
आठ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने का दावा: डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके प्रशासन ने वैश्विक शांति के लिए अभूतपूर्व काम किया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्धों और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाई है, जिनमें कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, आर्मेनिया-अजरबैजान, मिस्र-इथियोपिया और इजरायल-हमास का मुद्दा शामिल है।
समिति पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप: ट्रंप ने नॉर्वेजियन नोबेल समिति पर राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित होकर निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुरस्कार न देना नोबेल प्रक्रिया पर एक ‘स्थायी दाग’ की तरह है, क्योंकि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति के बजाय अमेरिका का होना चाहिए था।
रूस-यूक्रेन और ईरान नीति पर जोर: ट्रंप ने अपनी सरकार के हालिया कूटनीतिक कदमों का हवाला देते हुए कहा कि उनका प्रशासन इस समय रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने और ईरान से जुड़े तनाव को दूर करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने तेहरान को चेतावनी भी दी कि उसे अमेरिकी शर्तों को मानना होगा।
संयुक्त राष्ट्र की आलोचना: रैली में ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र (UN) पर भी निशाना साधा और कहा कि वैश्विक विवादों को सुलझाने में इस संस्था ने कोई प्रभावी मदद नहीं की।
चुनावी संदर्भ: 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी संसदीय (मिडटर्म) चुनावों से ठीक पहले आई ट्रंप की इस तीखी टिप्पणी को रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों को एकजुट करने और अपने प्रशासन की विदेश, आर्थिक तथा सुरक्षा नीतियों को भुनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

