गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के खतरे और बचाव के उपाय
गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप के खतरे और बचाव के उपाय
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनमें ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव भी शामिल है। अक्सर महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को एक आम समस्या मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी मुख्य बातें और आंकड़े:
वैश्विक आंकड़े और खतरे: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 10 से 15 प्रतिशत गर्भधारण में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। इसके विकारों के कारण हर साल दुनियाभर में लगभग 42,000 महिलाओं की मौत होने का अनुमान है, जबकि पांच लाख से अधिक मृत-जन्म (Stillbirth) और नवजात शिशुओं की मौत के मामले भी दर्ज होते हैं।
प्री-एक्लेम्पसिया की गंभीर समस्या: यह गर्भावस्था से जुड़ी एक बेहद खतरनाक स्थिति है, जो आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद विकसित होती है। इसमें हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ किडनी या लिवर जैसे अंगों पर असर पड़ने के संकेत मिलते हैं और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा भी पाई जाती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह मां और बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रमुख लक्षण: तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन या चमक दिखाई देना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, चेहरे और हाथों में अचानक सूजन, या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालांकि, कई मामलों में शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है।
डब्लूएचओ की वैश्विक रणनीति: गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर से होने वाली मौतों और जटिलताओं को रोकने के लिए WHO ने 2026 से 2035 और उसके बाद तक की नई रणनीति पेश की है। इसका उद्देश्य बेहतर जांच, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और समय पर आपातकालीन इलाज को बढ़ावा देना है।
प्रसव के बाद भी सावधानी जरूरी: गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप का असर बच्चे के जन्म के बाद भी बना रह सकता है। ऐसी महिलाओं में भविष्य में हाई बीपी, हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए डिलीवरी के बाद भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना आवश्यक है।

