अमेरिका का नया वीजा बॉन्ड नियम: 50 देशों के नागरिकों को जमा करने होंगे 20,000 डॉलर तक, भारत को मिली राहत
अमेरिका का नया वीजा बॉन्ड नियम: 50 देशों के नागरिकों को जमा करने होंगे 20,000 डॉलर तक, भारत को मिली राहत
अमेरिका ने वीजा नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए 50 ऐसे देशों की सूची जारी की है, जिनके नागरिकों को बिजनेस और टूरिस्ट (बी1/बी2) वीजा हासिल करने के लिए 20,000 डॉलर तक का वीजा बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस नियम से भारत को बाहर रखा गया है, यानी भारतीय पासपोर्ट धारकों को यह बॉन्ड नहीं देना होगा।
किन देशों पर लागू होगा यह नियम?
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी इस अपडेटेड सूची में दक्षिण एशिया के पड़ोसी देश बांग्लादेश, भूटान और नेपाल शामिल हैं। इसके अलावा अफ्रीका, कैरेबियाई क्षेत्र, मध्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र के कई अन्य देश भी इस सूची का हिस्सा हैं।
लागू होने की तिथियां: भूटान के नागरिकों के लिए यह नियम 1 जनवरी से, जबकि बांग्लादेश और नेपाल के नागरिकों के लिए 21 जनवरी से लागू है।
क्या है वीजा बॉन्ड प्रोग्राम और इसकी शर्तें?
यह प्रोग्राम अमेरिकी ‘इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट’ की धारा 221(जी)(3) के तहत चलाया जा रहा है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
बॉन्ड की राशि: सूची में शामिल देशों के आवेदकों को वीजा इंटरव्यू के दौरान कांसुलर अधिकारी के निर्देशानुसार 10,000 डॉलर, 15,000 डॉलर या 20,000 डॉलर का बॉन्ड जमा करना होगा।
भुगतान प्रक्रिया: आवेदकों को अमेरिकी वित्त विभाग के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘पे डॉट जीओवी’ के जरिए फॉर्म आई-352 जमा करना होगा। विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदक अधिकारी के निर्देश से पहले कोई भुगतान न करें।
रकम वापसी: बॉन्ड की सभी शर्तों और नियमों का पालन करने पर जमा की गई राशि (जो आवेदक या उसके किसी रिश्तेदार/दोस्त द्वारा दी जा सकती है) वापस मिल जाएगी। हालांकि, बॉन्ड जमा करने का मतलब वीजा मिलने की कोई गारंटी नहीं है।
यात्रा और अन्य कड़े नियम
इस प्रोग्राम के तहत वीजा पाने वाले यात्रियों को अमेरिका में प्रवेश और वापसी के लिए कुछ अतिरिक्त नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा:
यात्रियों को केवल अधिकृत कमर्शियल एयरपोर्ट्स का ही इस्तेमाल करना होगा।
वे यात्रा के लिए चार्टर विमान, जनरल एविएशन, जमीन के रास्ते या समुद्री बंदरगाहों का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
मुख्य उद्देश्य: इस नियम को लाने का मुख्य मकसद उन मामलों पर लगाम लगाना है, जहां लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका जाते हैं लेकिन तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी वहां अवैध रूप से रुके रहते हैं (वीजा ओवरस्टे)। अमेरिकी सरकार डीएचएस की ‘एंट्री/एक्जिट ओवरस्टे रिपोर्ट’ के आंकड़ों के आधार पर इन देशों का चयन करती है।

