आखिरी धमाके से भारत का कमाल! एशियन गेम्स 2026 में 21 गोल्ड समेत 85 मेडल, चौथे स्थान पर कब्जा
जापान के ऐची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स 2026 का आखिरी दिन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। जब मेडल टैली में भारत पांचवें स्थान पर फंसा हुआ था, तब टीम इंडिया ने आखिरी दो दिनों में 11 गोल्ड मेडल का धमाका कर दिया। नतीजा—21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य के साथ कुल 85 मेडल, और चौथे स्थान पर मजबूत पकड़।
यह भारत का एशियन गेम्स इतिहास में दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है। 2023 हैंगझोउ में रिकॉर्ड 107 मेडल (28 गोल्ड) के बाद यह दूसरा सर्वश्रेष्ठ है। गोल्ड की संख्या भी दूसरे नंबर पर है।
आखिरी दिन का गोल्डन धमाका
3 अक्टूबर को भारत ने पांच गोल्ड मेडल एक साथ झटके। सबसे पहले 17 वर्षीय तीरंदाज कुमकुम अनिल मोहोद ने महिलाओं की रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में साउथ कोरिया की ओह येजिन को शूट-ऑफ में हराकर इतिहास रच दिया। वे एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उनके नाम दो गोल्ड और एक सिल्वर भी दर्ज हुए।
इसके बाद गोल्फर प्रणवी उर्स ने महिलाओं की व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले में भारत का पहला व्यक्तिगत गोल्फ गोल्ड दिलाया। वे दबाव में भी शांत रहीं और एक स्ट्रोक से जीत हासिल की।
फिर क्रिकेट और हॉकी टीमों ने अपना खिताब बचाया। पुरुष क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को 19 रन से हराया, जबकि हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से रौंद दिया। यह हॉकी गोल्ड 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधा क्वालीफिकेशन भी दिलाता है। कुश्ती में अमन सेहरावत ने 57 किग्रा में गोल्ड जीतकर दिन को पूरा कर दिया।
किन खेलों ने किया कमाल?
– एथलेटिक्स: 24 मेडल (सबसे ज्यादा)
– शूटिंग: 15 मेडल
– आर्चरी: 9 मेडल (5 गोल्ड)
– बॉक्सिंग: 6 मेडल (3 गोल्ड—लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा, अंकुश पंघाल)
– कुश्ती, हॉकी, कबड्डी, क्रिकेट: दो-दो गोल्ड
महिला और पुरुष हॉकी, क्रिकेट और कबड्डी टीमों ने डबल गोल्ड sweep पूरा किया। नीरू ढांडा ने ट्रैप में 48 साल बाद भारत को व्यक्तिगत गोल्ड दिलाया।
मेडल टैली में टॉप-5
| रैंक | देश | गोल्ड | सिल्वर | ब्रॉन्ज | कुल |
| 1 | चीन | 169 | 89 | 83 | 341 |
| 2 | जापान | 83 | 95 | 91 | 269 |
| 3 | दक्षिण कोरिया| 39 | 43 | 68 | 150 |
| 4 | भारत | 21| 27| 37 | 85|
| 5 | उज्बेकिस्तान | 21 | 25 | 24 | 70 |
उज्बेकिस्तान के साथ गोल्ड बराबर रहे, लेकिन ज्यादा सिल्वर और ब्रॉन्ज की वजह से भारत चौथे पर रहा।
क्या रहा खास?
हैंगझोउ के मुकाबले कुल मेडल 21 कम रहे, लेकिन आखिरी दिनों का यह “गोल्डन पंच” दिखाता है कि टीम इंडिया दबाव में कितनी मजबूत हो चुकी है। कई युवा खिलाड़ियों ने डेब्यू में ही इतिहास लिख दिया। कुमकुम मोहोद और प्रणवी उर्स जैसी नई पीढ़ी भविष्य के लिए मजबूत संकेत दे रही है।
एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए सिर्फ मेडल की गिनती नहीं, बल्कि विश्वास और नई ऊंचाइयों की कहानी बनकर उभरा। अब नजर 2028 ओलंपिक पर है, जहां ये ही खिलाड़ी तिरंगे को और ऊंचा फहराएंगे।
भारत ने एक बार फिर साबित किया—जब समय आता है, तो गोल्डन पंच जरूर लगता है!
