पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, 6 महीने में ‘लव-लैंड जिहाद’ के खिलाफ कानून और UCC लाने की घोषणा
पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, 6 महीने में ‘लव-लैंड जिहाद’ के खिलाफ कानून और UCC लाने की घोषणा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कई बड़े ऐलान किए हैं। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले छह महीने के भीतर ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कड़े कानून लाएगी और उत्तराखंड व गुजरात की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेगी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रमुख घोषणाएं:
UCC और उच्चस्तरीय समिति: राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े कानूनों को एक समान बनाएगी।
1000 करोड़ का धार्मिक टूरिज्म सर्किट: सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की एक परियोजना की घोषणा की है, जिसे दो साल में पूरा किया जाएगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम: आगामी कार्यक्रमों के तहत नवंबर में नेताजी इंडोर स्टेडियम में 20,000 लोगों द्वारा सामूहिक ‘हनुमान चालीसा’ पाठ और 29 दिसंबर को 10 लाख लोगों द्वारा सामूहिक ‘गीता पाठ’ का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, आगामी गंगासागर मेले में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले सियासत तेज, 2021 के चोट विवाद पर भी साधा निशाना
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सीएम सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने पैर में चोट लगने का ‘झूठा प्रचार’ किया था।
अस्पताल के दस्तावेजों का हवाला: सीएम सुवेंदु ने नबन्ना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान SSKM अस्पताल और बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस की 11 मार्च 2021 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उन दस्तावेजों में साफ था कि पैर में “फ्रैक्चर या डिसलोकेशन का कोई सबूत नहीं” था।
सीआईडी जांच के संकेत: उन्होंने कहा कि उपचुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सीआईडी जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि जनता को गुमराह करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके।

