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दुनिया का नक्शा बदलने की दिशा में बड़ा कदम: संयुक्त राष्ट्र में 164 देशों ने ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया

दुनिया का नक्शा बदलने की दिशा में बड़ा कदम: संयुक्त राष्ट्र में 164 देशों ने ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया

अमेरिका अकेला विरोध में, भारत ने समर्थन जताया

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार (4/5 सितंबर 2026) को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ‘करेक्ट द मैप’ (Correct the Map) प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित कर दिया। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट किया, जबकि अमेरिका ने अकेले इसके खिलाफ मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान से दूरी बनाए रखी।

क्या है यह प्रस्ताव?

यह प्रस्ताव टोगो ने अफ्रीकी संघ (AU) और अफ्रीकी समूह की ओर से पेश किया था। इसका मकसद दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों के वास्तविक आकार को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है।

सदियों से इस्तेमाल हो रहे मर्केटर प्रोजेक्शन में भूमध्य रेखा से दूर के इलाकों का आकार बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। इसकी वजह से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का आकार छोटा नजर आता है, जबकि ग्रीनलैंड जैसे छोटे इलाके बड़े दिखते हैं। हकीकत में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि यह विकृति अफ्रीका और अन्य दक्षिणी क्षेत्रों के बारे में गलत धारणा पैदा करती है। इसलिए स्कूलों, मीडिया, सरकारों और टेक कंपनियों को इक्वल एरिया प्रोजेक्शन (जैसे Equal Earth) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जहां महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल सही दिखे।

यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है। यह सीमाओं या राजनीतिक नक्शों को नहीं बदलता, सिर्फ शैक्षिक और सामान्य उपयोग के नक्शों में ज्यादा सटीक प्रतिनिधित्व की बात करता है।

भारत का रुख

भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि रघू पुरी ने कहा कि भारत नक्शों में महाद्वीपों के सही आकार को दिखाने के इरादे का स्वागत करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी एक खास प्रोजेक्शन (जैसे Equal Earth) का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि समान क्षेत्रफल वाले नक्शों के व्यापक उपयोग का समर्थन करता है।

अमेरिका का विरोध

अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। वाशिंगटन ने इसे “रेडिकल वैचारिक परियोजना” बताया और कहा कि यह शांति और समृद्धि जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

अफ्रीका को उसके वास्तविक आकार में दिखाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को वैश्विक मंजूरी मिली।

फ्रांस जैसे कुछ देशों ने पहले ही मर्केटर छोड़ने का फैसला लिया है।

अफ्रीकी संघ ने पहले ही Equal Earth प्रोजेक्शन को अपनाया था।

टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसे ने इसे “ऐतिहासिक पल” बताते हुए कहा, “दुनिया ने नक्शा सुधारने का फैसला लिया है। यह सिर्फ नक्शा नहीं, न्याय, गरिमा और समानता का सवाल है।”

नोट: कुछ शुरुआती रिपोर्टों में 116 देशों का जिक्र गलती से हो रहा था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पक्ष में 164 वोट पड़े हैं।

यह फैसला दुनिया के नक्शे को ज्यादा संतुलित और सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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