ज्योतिष: कुंडली में कमजोर ‘देवगुरु बृहस्पति’ (गुरु) को मजबूत करने के आसान उपाय; करियर और धन में मिलेगी तरक्की
ज्योतिष: कुंडली में कमजोर ‘देवगुरु बृहस्पति’ (गुरु) को मजबूत करने के आसान उपाय; करियर और धन में मिलेगी तरक्की
नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, भाग्य, धन, धार्मिक कार्य और मान-सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि यदि जातक की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत स्थिति में हो, तो व्यक्ति को करियर में अपार सफलता, उच्च पद और आर्थिक समृद्धि हासिल होती है। वहीं, गुरु के कमजोर या पीड़ित होने पर कड़ी मेहनत के बाद भी व्यक्ति को अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
1. कुंडली में गुरु कमजोर होने के प्रमुख लक्षण
करियर में अड़चनें: दिन-रात मेहनत करने के बाद भी नौकरी में प्रमोशन का बार-बार अटकना या बिजनेस की ग्रोथ रुक जाना।
आर्थिक व प्रशासनिक समस्याएं: आय के साधन बनने के बाद भी धन संचय (बचत) न होना और कार्यस्थल पर उच्च अधिकारियों के साथ मतभेद रहना।
निर्णय क्षमता में कमी: किसी महत्वपूर्ण विषय या जरूरी फैसले के वक्त भ्रम (Confusion) की स्थिति बनना और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार रुकावटें आना।
2. बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के 5 प्रभावी उपाय
बजुर्गों व गुरुओं का सम्मान: गुरु ज्ञान के प्रतीक हैं। अतः अपने माता-पिता, शिक्षकों, बड़े-बुजुर्गों और मार्गदर्शकों का सम्मान करें तथा उन्हें धार्मिक पुस्तकें, पेन या डायरी उपहार में दें।
पीले रंग का उपयोग व सात्विक आहार: गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें। अपने भोजन में चने की दाल, बेसन और हल्दी जैसी पीली वस्तुओं को शामिल करें तथा तामसिक खान-पान से दूर रहें।
हल्दी या केसर का तिलक: प्रतिदिन (विशेषकर गुरुवार को) स्नान के बाद माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाने से नकारात्मकता दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
बृहस्पति मंत्र का जाप: सुबह स्नान के उपरांत शांत चित्त से ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का कम से कम 11, 21 या 108 बार जाप करें।
विद्या दान व शैक्षणिक सहायता: जरूरतमंद विद्यार्थियों और बच्चों की पढ़ाई में मदद करें; उन्हें किताबें, कॉपी या अन्य अध्ययन सामग्री दान करें।
3. कर्म और निरंतरता भी है आवश्यक
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, हालांकि ये उपाय ग्रह दोषों को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मददगार होते हैं, लेकिन सफलता के लिए कड़ी मेहनत, निरंतर कौशल विकास (Skill Development), अनुशासन और सही समय पर सही फैसले लेना भी उतना ही अनिवार्य है।
