सिंधी समाज का प्रमुख पर्व तीजड़ी आज, श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा
सिंधी समाज का प्रमुख पर्व तीजड़ी आज, श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा
नई दिल्ली: सिंधी समाज का प्रमुख पारंपरिक पर्व तीजड़ी आज, 31 अगस्त को श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से जुड़ा है और सिंधी परिवारों में इसका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है।
पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य की कामना
तीजड़ी के अवसर पर विवाहित महिलाएं पति के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। कई परिवारों में पूरे दिन व्रत रखने की परंपरा है, जबकि कुछ महिलाएं निर्जल व्रत भी रखती हैं। अविवाहित युवतियां भी सुखी वैवाहिक जीवन और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।
पर्व के दौरान मेहंदी लगाने, पारंपरिक रूप से सजने-संवरने और सामूहिक रूप से त्योहार मनाने की परंपरा भी देखने को मिलती है। तीजड़ी महिलाओं के धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल और सिंधी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
तीजड़ी माता की पूजा और कथा का विशेष महत्व
तीजड़ी पर्व में तीजड़ी माता की पूजा और कथा का विशेष महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं शाम को पूजा-अर्चना करती हैं और तीजड़ी माता की कथा सुनती हैं। कुछ जगहों पर सामूहिक रूप से भी पूजा का आयोजन किया जाता है।
पर्व की तैयारियों में मेहंदी का भी खास स्थान है। महिलाएं और युवतियां तीजड़ी से पहले हाथों पर मेहंदी लगाती हैं, जिससे पर्व का पारंपरिक और सांस्कृतिक रंग और गहरा हो जाता है।
चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा
तीजड़ी व्रत से जुड़ी प्रमुख परंपराओं में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलना शामिल है। व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा-अर्चना और अर्घ्य देने के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है।
हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि, व्रत खोलने की प्रक्रिया और अर्पित की जाने वाली सामग्री में कुछ अंतर हो सकता है।
सिंधी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक
तीजड़ी केवल व्रत का अवसर नहीं है, बल्कि यह सिंधी समाज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने वाला पर्व भी है। पूजा, कथा, मेहंदी और चंद्रमा को अर्घ्य देने जैसी परंपराएं इसे सिंधी समाज की विशिष्ट पहचान से जोड़ती हैं।
बदलते समय के साथ पर्व मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन इसकी मूल धार्मिक और सांस्कृतिक भावना आज भी अनेक सिंधी परिवारों में कायम है।
कजरी तीज से अलग है तीजड़ी की पहचान
तीजड़ी का संबंध भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया से होने के कारण इसे कुछ अन्य क्षेत्रों में मनाई जाने वाली कजरी तीज के साथ जोड़ा जाता है। हालांकि सिंधी समाज में इसे अपनी विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ तीजड़ी के नाम से मनाया जाता है।
31 अगस्त 2026 को तीजड़ी के अवसर पर सिंधी परिवारों में व्रत, पूजा-अर्चना और पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सिंधी समाज की सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक परंपराओं को जीवंत रखने का अवसर भी है।
