उत्तराखंड में बारिश का कहर! मसूरी से चमोली तक भूस्खलन और मलबे ने बढ़ाई मुसीबत, कई सड़कें बंद
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उत्तराखंड में बारिश का कहर! मसूरी से चमोली तक भूस्खलन और मलबे ने बढ़ाई मुसीबत, कई सड़कें बंद
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। मसूरी के पानी वाले बैंड से लेकर कर्णप्रयाग, टिहरी और चमोली तक पहाड़ी दरकने, मलबा आने और सड़कें बाधित होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मसूरी के पानी वाले बैंड में फिर दरकी पहाड़ी
पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर पानी वाले बैंड को सुर्खियों में ला दिया है। बीती देर रात से जारी बारिश के बीच यहां पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। देखते ही देखते मलबा नीचे की ओर आ गिरा, जिसके बाद पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में बने मकानों पर भी खतरा मंडराने लगा है।
पानी वाले बैंड से सामने आई ताजा तस्वीरों में इलाके की संवेदनशील स्थिति साफ दिखाई दे रही है। जिस हिस्से में भूस्खलन हुआ है, उसके ठीक ऊपर मकान बने हुए हैं। ऐसे में बारिश का सिलसिला जारी रहने पर पहाड़ी का कमजोर हिस्सा और खिसकने की आशंका बनी हुई है।
पहले से संवेदनशील है पानी वाला बैंड
पानी वाला बैंड लंबे समय से भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। बारिश के दौरान यहां सड़क धंसने, पहाड़ी से मलबा आने और पानी के तेज बहाव की घटनाएं सामने आती रही हैं।
हाल के दिनों में भी भूस्खलन के कारण मसूरी-देहरादून मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ था। सड़क के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचने के बाद अब दोबारा पहाड़ी दरकने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान पहाड़ी से मलबा और पानी लगातार नीचे की ओर आता है। इससे सड़क के साथ-साथ आसपास बने भवनों की सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना रहता है।
2025 की आपदा की याद हुई ताजा
पानी वाले बैंड की मौजूदा तस्वीरों ने लोगों को सितंबर 2025 की उस भयावह आपदा की याद दिला दी है, जब भारी बारिश और भूस्खलन से यह इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
इसके बाद से हर बरसात में पानी वाला बैंड लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही यहां भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और स्थायी समाधान की जरूरत महसूस होती है।
कर्णप्रयाग में पहाड़ी से गिरे बड़े बोल्डर, वाहन क्षतिग्रस्त
चमोली जिले के कर्णप्रयाग में भी रविवार सुबह भारी बारिश के बीच सुभाषनगर में पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक दरक गया। पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर और पेड़ सड़क पर आ गिरे।
भूस्खलन की चपेट में आने से कई स्कूटी और मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हो गईं। सड़क किनारे दुकान चला रहा एक व्यक्ति भी मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गया। उसने समय रहते मौके से हटकर अपनी जान बचाई।
भूस्खलन के बाद आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण लोगों ने मौके से दूरी बना ली।
सिमली-ग्वालदम मार्ग हुआ बाधित
भूस्खलन के कारण सिमली-ग्वालदम मोटर मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। मलबे की चपेट में आने से एक मकान को भी खतरा पैदा हो गया है।
घटना की सूचना मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से सड़क से मलबा हटाने का काम शुरू किया। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी से दोबारा मलबा आने का खतरा बना हुआ है।
फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर भी बढ़ी परेशानी
टिहरी जिले में लगातार हो रही तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-94 पर कई स्थानों पर मलबा आने और सड़क क्षतिग्रस्त होने से यातायात प्रभावित हुआ है।
सड़क खोलने में कई घंटे लगने के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। बारिश के बीच यात्रियों को सड़क की स्थिति को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क खोलने के काम में जुटे हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं।
आगराखाल में ब्रेक फेल होने से ट्रक पलटा
आगराखाल के पास भी बड़ा हादसा होने से टल गया। ब्रेक फेल होने के बाद सीमेंट से भरा एक ट्रक सड़क किनारे पलट गया। ट्रक खाई में जाने से बाल-बाल बचा और क्रॉस बैरियर पर अटक गया।
हादसे में ट्रक चालक की जान भी बच गई। बताया गया कि सीमेंट से भरा ट्रक हरिद्वार के भगवानपुर से उत्तरकाशी जा रहा था।
बारिश के कारण जिले में कई जगह सड़क पर मलबा आने और सड़क क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही प्रभावित है।
चमोली की सोल घाटी में दलदल में फंसी कार
चमोली जिले के थराली विकासखंड की सोल घाटी में बारिश ने ग्रामीण सड़कों की बदहाली भी सामने ला दी है। थराली-डूंगरी मोटर मार्ग पर जगह-जगह कीचड़ और दलदल बन गया है।
इसी दलदल में एक अल्टो कार फंस गई। ग्रामीणों ने पिकअप वाहन की मदद से रस्सी बांधकर काफी मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला।
सोल घाटी करीब 16 गांवों का बड़ा ग्रामीण क्षेत्र है और थराली तहसील मुख्यालय व मुख्य बाजार तक पहुंचने के लिए यह सड़क ग्रामीणों का प्रमुख संपर्क मार्ग है।
हर बरसात में बिगड़ जाती है सड़क की हालत
ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान सड़क की स्थिति हर साल खराब हो जाती है। कई स्थानों पर भूस्खलन होने के साथ सड़क का हिस्सा बह जाता है और बड़े पत्थर व मलबा जमा होने से आवाजाही जोखिमभरी हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क पीएमजीएसवाई के अधीन है, लेकिन पर्याप्त मशीनरी और संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण बरसात में सड़क खोलने में कई बार लंबा समय लग जाता है।
सड़क बंद होने की स्थिति में सोल घाटी के लोगों को कई बार 10 से 12 किलोमीटर तक पैदल चलकर तहसील मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
नंदानगर से जोड़ने की सड़क की कवायद भी अधूरी
सोल घाटी को नंदानगर से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की कवायद लंबे समय से चल रही है। ग्रामीणों के अनुसार तकनीकी कारणों से कुछ हिस्सों में काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है।
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण से जुड़ी अड़चनों को दूर कर काम में तेजी लाने की मांग की है, ताकि घाटी के गांवों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके।
प्रशासन ने लोगों से की सावधानी बरतने की अपील
लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि बरसात के दौरान यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लें और बेहद जरूरी होने पर ही सफर करें।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के बीच भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
