नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा; 2,498 लोग अब भी लापता
नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ा; 2,498 लोग अब भी लापता
नेपाल में भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान जारी है, लेकिन अब एक और बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने और ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुकने से कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में हाई अलर्ट
नेपाल में रविवार सुबह भोटेकोशी नदी का जलस्तर और बहाव तेजी से बढ़ने की सूचना के बाद नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और लगातार सतर्क रहने की अपील की गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। चितवन समेत नदी के निचले इलाकों में भी लोगों को अलर्ट रहने को कहा गया है।
ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुका, बनी झील
नेपाल नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से करीब 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह बाधित मिला है।
प्रवाह रुकने के कारण करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में झील बन गई है। आशंका है कि झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूटने पर अचानक बड़ी बाढ़ आ सकती है।
अथॉरिटी ने कहा है कि शुरुआती आकलन में इस इलाके में कुछ और झीलें बनने के संकेत भी मिले हैं। ऐसे में नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य से 3 मीटर ऊपर
बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के मुताबिक, धादिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य स्तर से करीब तीन मीटर ऊपर पहुंच गया है। अधिकारियों के अनुसार, इसका मुख्य कारण रसुवा के भोटेकोशी क्षेत्र से आया बाढ़ का पानी है।
हालांकि जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ज्यादा खतरा नहीं है, क्योंकि नदी किनारे रहने वाले कई लोग पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं।
675 लोगों की मौत, 2,498 अभी भी लापता
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत, खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
नेपाल में 275 भारतीय और 128 भारतीय मूल के लोग लापता
आपदा के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 275 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर हैं।
वहीं, नेपाल से अब तक 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। पिछले 48 घंटों में चीन के रास्ते 598 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 900 भारतीय चीन सीमा क्षेत्र में सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे कर्मचारियों की तलाश जारी
नेपाल की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी राहत अभियान जारी है। करीब 898 कर्मचारी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
ऊर्जा एवं जल संसाधन मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ के अनुसार, त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की मलबे और गाद से भरी सुरंग में बचाव अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है।
बचावकर्मियों ने सुरंग के ऊपरी हिस्से में छेद कर ऑक्सीजन और रोशनी पहुंचाने के साथ अंदर मौजूद लोगों तक ध्वनि संकेत भेजने का प्रयास किया है। अब मैनहोल बनाकर सुरंग के अंदर पहुंचने की तैयारी की जा रही है।
तीन दिन बाद मलबे से 6 साल की बच्ची सुरक्षित निकली
नेपाल में जारी तबाही के बीच रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र से राहत की खबर भी सामने आई। सशस्त्र पुलिस बल की टीम ने मलबे के नीचे से 6 साल की बच्ची को तीन दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू टीम को मलबे के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी थी। इसके बाद टीम ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर उसे बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को बेहतर इलाज के लिए काठमांडू रेफर किया गया।
एक और बड़ी बाढ़ की आशंका ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में पहले से जारी राहत अभियान के बीच ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुकने और झील बनने की खबर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों को आशंका है कि प्राकृतिक बांध टूटने की स्थिति में नीचे की ओर अचानक तेज बाढ़ आ सकती है।
प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और किसी भी नए अलर्ट को गंभीरता से लेने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
