उत्तराखंड

2027 चुनाव से पहले UKD का बड़ा एक्शन, आशुतोष नेगी पार्टी से निष्कासित

2027 चुनाव से पहले UKD का बड़ा एक्शन, आशुतोष नेगी पार्टी से निष्कासित

पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप, प्राथमिक सदस्यता भी खत्म; रायपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे नेगी

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी ने अपने तेजतर्रार नेता आशुतोष नेगी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप

यूकेडी ने आशुतोष नेगी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। निष्कासन के साथ ही उनकी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है। चुनाव से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई को पार्टी के भीतर बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

पहले पद से हटाया, अब पार्टी से बाहर

आशुतोष नेगी के खिलाफ यह पहली कार्रवाई नहीं है। करीब दो महीने पहले ही यूकेडी ने उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद और अन्य दायित्वों से मुक्त कर दिया था। उस समय पार्टी की ओर से बाकायदा पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी गई थी।

अध्यक्ष ने दी थी नसीहत

निष्कासन से पहले यूकेडी अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती की ओर से आशुतोष नेगी को पार्टी लाइन का पालन करने की नसीहत दी गई थी। पार्टी के मुताबिक, निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के बाद अब उनके खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई है।

रायपुर सीट से चुनाव की तैयारी

आशुतोष नेगी आगामी विधानसभा चुनाव में रायपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में चुनाव से पहले उनका पार्टी से बाहर होना उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।

यूकेडी के तेजतर्रार नेताओं में रहे नेगी

आशुतोष नेगी उत्तराखंड क्रांति दल के उन नेताओं में गिने जाते रहे हैं, जो अक्सर सड़क पर आंदोलनों और मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आते हैं। उनकी सक्रिय और आक्रामक राजनीतिक शैली के चलते पार्टी में उनकी अलग पहचान बनी थी।

1979 में हुई थी यूकेडी की स्थापना

उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना 25 जुलाई 1979 को हुई थी। पार्टी को उत्तराखंड की प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक ताकत के रूप में देखा गया और अलग राज्य आंदोलन में भी यूकेडी ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।

राज्य आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

यूकेडी का प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों और संस्कृति की रक्षा करना रहा है। अलग राज्य बनने के बाद पार्टी ने कुछ चुनावों में सीटें जीतीं, लेकिन धीरे-धीरे उसका राजनीतिक प्रभाव सीमित होता चला गया।

2027 से पहले बढ़ी सियासी हलचल

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे समय में यूकेडी के एक प्रमुख नेता का पार्टी से निष्कासन क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि आशुतोष नेगी आगे क्या राजनीतिक कदम उठाते हैं और इसका आगामी चुनाव पर क्या असर पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *