उत्तराखंड

उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त: मेधावी छात्राओं को ‘नंदा गौरा योजना’ का लाभ न मिलने पर सरकार से जवाब तलब

उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त: मेधावी छात्राओं को ‘नंदा गौरा योजना’ का लाभ न मिलने पर सरकार से जवाब तलब

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 12वीं पास मेधावी बालिकाओं को ‘नंदा गौरा योजना’ की प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने के मामले में राज्य सरकार और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग से कड़े सवाल किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने पूछा कि पात्र छात्राओं को अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं दिया गया।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास योजना चलाने के लिए बजट नहीं है तो ऐसी योजनाओं को बंद कर देना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित विभागों को मामले की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

439 छात्राओं को मिलनी है 51-51 हजार रुपये की राशि

मामला चमोली जिले की सामाजिक कार्यकर्ता ममता नेगी की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका के मुताबिक, चमोली जिले में वर्ष 2022-23 में इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने वाली 439 छात्राओं ने योजना के तहत वर्ष 2023 में ही अपने विद्यालयों के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे।

योजना के तहत प्रत्येक पात्र छात्रा को आगे की पढ़ाई के लिए 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलनी थी। संबंधित विभाग ने सरकार से इसके लिए करीब 2.45 करोड़ रुपये के बजट की मांग की थी, लेकिन लंबे समय बाद भी बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण छात्राओं को राशि नहीं मिल पाई।

सरकार ने कहा- वित्त विभाग के पास मामला

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला फिलहाल वित्त विभाग के पास विचाराधीन है और जल्द ही आवश्यक बजट जारी किया जाएगा।

वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि राशि मिलने में देरी से गरीब परिवारों की छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सभी पात्र छात्राओं को बिना देरी योजना का समान लाभ देने की मांग की।

पिंडारी ग्लेशियर से लापता ट्रेकर मामले में हाईकोर्ट का आदेश, पिता का DNA सैंपल लेने के निर्देश

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर से लापता ट्रेकर अभिषेक चौहान के मामले में उनके पिता का ब्लड सैंपल लेकर DNA जांच कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति आलोक माहरा की पीठ ने लापता ट्रेकर के पिता देशराज की याचिका पर सुनवाई की।

उत्तर प्रदेश के शामली निवासी 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान 29 मई को पिंडारी ग्लेशियर से लौटते समय लापता हो गए थे। उनके तलाश के लिए पुलिस, राज्य आपदा प्रबंधन बल और वन विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाया गया, लेकिन अभी तक उनका पता नहीं चल सका है।

नदी से मिला था शव

सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी विवेक चंद अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि 27 जून को कीर्तिनगर में पिंडर नदी से एक शव बरामद हुआ था। शव का DNA सैंपल सुरक्षित रखा गया है।

जांच अधिकारियों को आशंका है कि नदी से बरामद शव लापता ट्रेकर अभिषेक चौहान का हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए उनके पिता का DNA सैंपल जरूरी बताया गया।

पिता ने शव को बेटे का मानने से किया इनकार

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि नदी से बरामद शव उनके बेटे से मेल नहीं खाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच के लिए पेश किया गया ब्लड सैंपल उनके बेटे के सैंपल से मेल नहीं खाता है।

इसके बाद अदालत ने नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल की पीएमओ को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता देशराज का ब्लड सैंपल उसी दिन लिया जाए। DNA जांच के जरिए अब यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि नदी से बरामद शव लापता ट्रेकर अभिषेक चौहान का है या नहीं।

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