चमोली (तमक नाला) आपदा अपडेट: अस्थाई मार्ग से यातायात सुचारु, रेस्क्यू जारी और वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश
चमोली (तमक नाला) आपदा अपडेट: अस्थाई मार्ग से यातायात सुचारु, रेस्क्यू जारी और वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश
उत्तराखंड के चमोली जिले में नीति घाटी को जोड़ने वाले ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग पर स्थित तमक नाले में उफान और वैली ब्रिज बहने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए यातायात बहाल कर दिया है।
1. मार्ग बहाली और रेस्क्यू ऑपरेशन की स्थिति
अस्थाई मोटर मार्ग तैयार: तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर युद्धस्तर पर काम करते हुए अस्थाई मोटर मार्ग तैयार कर दिया गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है।
दूसरे दिन भी सर्च अभियान जारी: वैली ब्रिज बहने के दौरान लापता हुए एक व्यक्ति की तलाश में दूसरे दिन भी सर्च व रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
संयुक्त टीम: जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना, ITBP, NDRF, SDRF और BRO की टीमें नदी तटों और आसपास के संभावित स्थलों पर गहनता से खोजबीन कर रही हैं।
सुरक्षा निर्देश: स्थानीय प्रशासन ने जलस्तर और मौसम की संवेदनशीलता को देखते हुए वाहन चालकों को अस्थाई मार्ग से आवागमन के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।
2. तमक नाला घटना का वैज्ञानिक अध्ययन (15 दिनों में मांगी रिपोर्ट)
सामरिक और स्थानीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती मार्ग पर हुई घटना की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों से विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कराने के निर्देश दिए हैं:
प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान शामिल: वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान, NRSC, IIRS, U-SAC, GSI, IMD और NIH।
अध्ययन के मुख्य बिंदु:
अचानक बढ़े जलप्रवाह के वास्तविक स्रोत की पहचान (बादल फटना, अत्यधिक बारिश या फ्लैश फ्लड)।
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में भूस्खलन, रॉकफॉल या हिमनद/जल निकायों की भूमिका का परीक्षण।
उपग्रह चित्रों (Satellite Images), रिमोट सेंसिंग, ड्रोन सर्वे और GIS आधारित तकनीकों का उपयोग।
भविष्य की रणनीति: 15 दिनों के भीतर मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS), रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जलस्तर/वर्षामापी सेंसर स्थापित किए जाएंगे ताकि भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके।
