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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: ‘लापता व्यक्ति’ की सूचना मिलते ही पुलिस को तुरंत दर्ज करनी होगी FIR, उम्र या जेंडर से कोई फर्क नहीं

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: ‘लापता व्यक्ति’ की सूचना मिलते ही पुलिस को तुरंत दर्ज करनी होगी FIR, उम्र या जेंडर से कोई फर्क नहीं

​सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ) ने मानव तस्करी को रोकने और लापता लोगों की तलाश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया है कि ‘लापता व्यक्ति’ की सूचना मिलने पर तुरंत FIR दर्ज करने का आदेश हर नागरिक पर लागू होता है, चाहे वह बच्चा हो या वयस्क।

​1. कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां और चेतावनी

​’व्यक्ति’ शब्द का अर्थ: कोर्ट ने राज्यों की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पिछले आदेश का मतलब सिर्फ बच्चों से था। कोर्ट ने इसे “जानबूझकर और गलत नीयत से खड़ा किया गया बहाना” बताते हुए साफ किया कि ‘व्यक्ति’ (Person) में हर उम्र और जेंडर के नागरिक शामिल हैं।

​अदालत की अवमानना (Contempt of Court): जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने 22 मई, 2026 के आदेश का पालन नहीं किया है या हलफनामा दाखिल नहीं किया है, उनके मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) और DGP को अवमानना नोटिस जारी किया गया है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर कारण बताओ हलफनामा दाखिल करना होगा।

​2. पुलिस प्रशासन और जांच के लिए निर्देश

​”गोल्डन आवर्स” का महत्व: लापता होने के शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए पुलिस प्राथमिक जांच या परिवार के ढूंढने का इंतजार किए बिना तुरंत FIR दर्ज करे।

​BNS की धाराएं: FIR में ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ (BNS) और मानव तस्करी/अपहरण से जुड़ी संबंधित धाराओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

​AHTU को ट्रांसफर: यदि मामला तस्करी का लगता है, तो बिना 4 महीने का इंतजार किए इसे तुरंत ‘एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट’ (AHTU) को सौंपा जाए। देश की सभी AHTU को 4 सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय करने का आदेश दिया गया है।

​डिजिटल एकीकरण: केंद्र सरकार को 6 सप्ताह के भीतर देशभर के सभी संबंधित ट्रैकिंग पोर्टलों को आपस में जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

​3. पीड़ितों की सुरक्षा और बायोमेट्रिक सत्यापन

​सुरक्षित सुपुर्दगी: बचाए गए व्यक्तियों को उनके परिजनों को सौंपा जाए। हालांकि, यदि परिवार की ही तस्करी में मिलीभगत हो, तो पीड़ित को बाल कल्याण समिति (CWC) या राज्य के सुरक्षा गृहों में रखा जाए।

​पहचान व वेरिफिकेशन: बरामद या बचाए गए हर व्यक्ति का तुरंत बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जाए ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित हो सके।

​मामले की अगली सुनवाई: 5 अक्टूबर, 2026 (दोपहर 2:00 बजे)।

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