ईरान-ओमान बातचीत: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सिंगल टू-वे रूट का प्रस्ताव
ईरान-ओमान बातचीत: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सिंगल टू-वे रूट का प्रस्ताव
तेहरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार, ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही सुचारू करने के लिए एक सिंगल टू-वे रूट (इंटरमीडिएट कॉरिडोर) बनाने पर बातचीत कर रहे हैं। यह नया कॉरिडोर मौजूदा अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (TSS) की अलग-अलग लेन की जगह लेगा, जिससे ऊर्जा शिपिंग पर लगी रुकावटें कम होने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है।
1. वार्ता के मुख्य बिंदु व प्रस्तावित व्यवस्था
सिंगल टू-वे कॉरिडोर: इस नए रूट को दोनों तटीय देशों (ईरान और ओमान) के सुरक्षा और पर्यावरणीय हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
हाईवे की तर्ज पर संचालन: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खाड़ी देशों में प्रवेश करने वाले जहाज ईरान के तट वाले रास्ते का और बाहर निकलने वाले जहाज ओमान के तट वाले रास्ते का उपयोग करेंगे।
अंतरिम व्यवस्था: यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक दोनों देश 1968 से लागू ‘इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन’ (IMO) की ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (TSS) का स्थाई विकल्प नहीं ढूंढ लेते।
द्विपक्षीय बातचीत: ईरान ने स्पष्ट किया कि इस वार्ता में केवल ईरान और ओमान शामिल हैं और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है।
2. ओमान और अमेरिका का रुख
ओमान की चुप्पी: ओमान के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस वार्ता को लेकर न तो कोई पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है।
ट्रंप के दावे को खारिज किया: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीधी बातचीत का दावा किया था, जिसे ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सिरे से खारिज कर दिया।
सुरक्षा स्थिति: समुद्री क्षेत्र में माइन्स (mines) की मौजूदगी की खबरों के बाद IMO ने जहाजों को TSS रूट से बचने की सलाह दी है।
3. ‘सर्विस फीस’ और सुरक्षा चिंताएं
सर्विस फीस की संभावना: रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अपने जलीय क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस वसूल सकता है (अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन से बचने के लिए इसे ‘टोल’ नाम नहीं दिया जाएगा)।
ओमानी रूट पर विवाद: बाघेई के अनुसार, ओमान के रास्ते अमेरिकी नौसेना द्वारा जहाजों को एस्कॉर्ट करने का प्रयास जून के सहमति-पत्र का उल्लंघन था और इससे सुरक्षा एवं पर्यावरणीय खतरे पैदा हुए थे।
