रुद्राभिषेक के बाद क्या हवन कराना अनिवार्य है? जानिए ज्योतिष व शास्त्र सम्मत नियम
रुद्राभिषेक के बाद क्या हवन कराना अनिवार्य है? जानिए ज्योतिष व शास्त्र सम्मत नियम
सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए रुद्राभिषेक सबसे फलदायी अनुष्ठान माना जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग पर जल, दूध, घी, पंचामृत, गन्ने का रस अथवा सरसों का तेल अर्पित करने की इस प्रक्रिया को लेकर अक्सर श्रद्धालुओं के मन में एक संशय रहता है कि क्या रुद्राभिषेक के बाद हवन कराना जरूरी है?
गोरखपुर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित सुजीत जी महाराज ने शास्त्रों और शिव पुराण के आधार पर इस विषय पर स्थिति स्पष्ट की है:
1. क्या रुद्राभिषेक के बाद हवन अनिवार्य है?
शास्त्रों में अनिवार्यता नहीं: पंडित सुजीत जी महाराज के अनुसार, शास्त्रों या शिव पुराण में रुद्राभिषेक के तुरंत बाद हवन कराने का कोई अनिवार्य नियम नहीं बताया गया है।
स्वयं में पूर्ण अनुष्ठान: रुद्राभिषेक अपने आप में एक संपूर्ण पूजा विधान है। इसमें हम प्रकृति द्वारा प्राप्त द्रव्यों को भगवान शिव को समर्पित करते हैं।
प्रमुख पीठों का उदाहरण: देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और मंदिरों (जैसे काशी विश्वनाथ) में भी रुद्राभिषेक के उपरांत हवन कराने की कोई अनिवार्य परंपरा नहीं है।
दोष नहीं लगता: यदि आप रुद्राभिषेक के बाद हवन नहीं भी करते हैं, तो पूजा में किसी प्रकार की कमी या दोष नहीं माना जाता।
2. हवन की आवश्यकता कब होती है?
शास्त्रों में हवन कराने के कुछ विशिष्ट नियम बताए गए हैं:
विशेष संकल्प या रुद्रयाग: यदि आपने किसी विशेष मनोकामना, बड़े अनुष्ठान, रुद्रयाग या महायज्ञ का संकल्प लिया हो, तब रुद्राभिषेक के साथ पूर्णाहुति के रूप में हवन किया जाता है।
मंत्रों के संकल्पित जाप के बाद: महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या किसी भी मूल मंत्र के संकल्पित अनुष्ठान/जाप के समापन पर हवन करना अनिवार्य होता है।
ग्रह शांति हेतु: कुंडली के अशुभ ग्रहों के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए किया जाने वाला हवन आवश्यक माना जाता है।
षोडश संस्कारों में: विवाह, मुंडन, नामकरण, उपनयन (जनेऊ) और गृह प्रवेश जैसे संस्कारों में हवन के बिना प्रक्रिया पूर्ण नहीं मानी जाती।
निष्कर्ष
सावन सोमवार या सावन शिवरात्रि के अवसर पर यदि आप अपने घर या मंदिर में केवल रुद्राभिषेक करा रहे हैं, तो इसके पश्चात् हवन कराना अनिवार्य नहीं है। निष्काम भावना या सामान्य भक्ति भाव से किया गया रुद्राभिषेक अपने आप में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूर्ण और फलदायी है।
