Friday, July 31, 2026
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किस्मत बदले न बदले, पर वक्त जरूर बदलता है: आर्थिक तंगी को मात देकर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर

किस्मत बदले न बदले, पर वक्त जरूर बदलता है: आर्थिक तंगी को मात देकर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर

​’रात नहीं ख्वाब बदलता है, मंजिल नहीं कारवां बदलता है, जज्बा रखो जीतने का क्योंकि किस्मत बदले न बदले, पर वक्त जरूर बदलता है।’

​यह पंक्तियां भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह की जिंदगी पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं। आर्थिक तंगी और कड़े संघर्ष के दौर से गुजरकर लवप्रीत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए सिल्वर मेडल (रजत पदक) अपने नाम किया।

​लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम (स्नैच + क्लीन एंड जर्क) का भार उठाकर यह सफलता हासिल की। हालांकि, वह महज 1 किलोग्राम के अंतर से गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए, लेकिन उन्होंने स्नैच राउंड में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया।

​स्नैच राउंड में बनाया नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड

​लवप्रीत सिंह का इस प्रतियोगिता में प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा:

​स्नैच राउंड: लवप्रीत ने 176 किलोग्राम का वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में नया रिकॉर्ड कायम किया।

​क्लीन एंड जर्क राउंड: उन्होंने 212 किलोग्राम का सफल भार उठाया।

​गोल्ड से चूके: अपने तीसरे प्रयास में लवप्रीत ने 217 किलोग्राम भार उठाने की कोशिश की। यदि वह इसमें सफल हो जाते, तो एक और नया रिकॉर्ड बनने के साथ ही उनके नाम गोल्ड मेडल भी हो जाता।

​दर्जी के बेटे की संघर्ष गाथा: सुई-धागे की जगह चुना वेटलिफ्टिंग

​लवप्रीत का यह पदक उनकी सालों की तपस्या और पारिवारिक समर्पण का परिणाम है:

​साधारण पृष्ठभूमि: लवप्रीत का परिवार बेहद साधारण है। उनके पिता पेशे से दर्जी (Tailor) हैं और दादा सब्जी बेचने का काम करते थे।

​परिवार का अटूट सहारा: घर में आर्थिक तंगी होने के बावजूद पिता ने लवप्रीत के सपनों को कभी दबने नहीं दिया। उन्होंने लवप्रीत को सुई और धागा थमाने की बजाय देश के लिए खेलने का हौसला दिया और उनकी खुराक व ट्रेनिंग में कभी कोई कमी नहीं आने दी।

​13 की उम्र से सफर: लवप्रीत ने महज 13 साल की उम्र में ही वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी।

​भारतीय नौसेना से मिला नया मोड़

​लवप्रीत के करियर में सबसे बड़ा और सकारात्मक मोड़ साल 2015 में आया, जब उन्हें भारतीय नौसेना (Indian Navy) में नौकरी मिली।

​नौकरी मिलने के बाद उन्हें पटियाला स्थित नेशनल ट्रेनिंग कैंप में प्रैक्टिस करने का मौका मिला, जिससे उनकी प्रतिभा को सही मार्गदर्शन मिला।

​महज दो सालों के भीतर उन्होंने खुद को साबित किया और कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में गोल्ड तथा एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

​इन सफलताओं के बाद वे भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम के मुख्य और भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

​संघर्ष और कड़ी मेहनत की बदौलत लवप्रीत सिंह ने न केवल अपने परिवार की किस्मत बदली है, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश का सिर भी गर्व से ऊंचा किया है।

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