संघर्ष और जज्बे की मिसाल: पीएचडी स्कॉलर और मां सीमा कालीरमन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज मेडल
संघर्ष और जज्बे की मिसाल: पीएचडी स्कॉलर और मां सीमा कालीरमन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज मेडल
कहते हैं कि ‘जहाँ चाह, वहाँ राह’। इस कहावत को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का नाम रोशन करने वाली महिला डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन ने सच साबित कर दिखाया है। 27 वर्षीय सीमा ने तमाम मुश्किलों, चोटों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत के लिए कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर सीमा का यह पहला बड़ा पदक है।
सीमा की यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि वह एक शीर्ष एथलीट होने के साथ-साथ चार साल के बेटे ‘रुद्र’ की मां भी हैं और अपनी पीएचडी की पढ़ाई भी पूरी कर रही हैं।
रोमांचक मुकाबले में नेटिंग की चुनौती को पछाड़ा
डिस्कस थ्रो के फाइनल मुकाबले में सीमा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। छह में से उनके चार प्रयास थ्रो साइड नेटिंग में फंसने के कारण अमान्य (इनवैलिड) हो गए। इसके बावजूद, संयम बनाए रखते हुए उन्होंने दो सटीक और शानदार थ्रो के दम पर पोडियम (पदक तालिका) में अपनी जगह पक्की की।
मां बनने के बाद करियर में आई नई ऊंचाई
सीमा के खेल का ग्राफ मां बनने के बाद तेजी से ऊपर चढ़ा है:
2022 से पहले: उनका पर्सनल बेस्ट थ्रो 48.08 मीटर था।
2024 (वापसी के बाद): बेटे रुद्र के जन्म के बाद 11 महीने का ब्रेक लेकर उन्होंने वापसी की और अपना प्रदर्शन सुधारकर 57.19 मीटर पहुंचाया।
2026: इस साल भुवनेश्वर में आयोजित इंडियन चैंपियनशिप में उन्होंने 59.73 मीटर का थ्रो फेंककर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (Personal Best) दर्ज किया।
पति बने कोच, चोट को मात देकर बनाई जगह
सीमा के इस शानदार सफर के पीछे उनके पति रविंदर कालीरमन का मार्गदर्शन और कोचिंग रही है। रविंदर खुद अंडर-18 और अंडर-20 स्तर पर भारत के लिए गोल्ड मेडल विजेता डिस्कस थ्रोअर रह चुके हैं।
सीमा का करियर आसान नहीं रहा। घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें तीन साल से अधिक समय तक मैदान से दूर रहना पड़ा था। हालांकि, उनकी लगन कम नहीं हुई:
उन्होंने 2025 नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और नेशनल टाइटल अपने नाम किया।
साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में भी उन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।
लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2026 एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया और कॉमनवेल्थ गेम्स की भारतीय टीम में जगह बनाई।
मैदान के साथ पढ़ाई में भी अव्वल
सीमा केवल खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी मिसाल कायम कर रही हैं। वह वर्तमान में चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी (CBLU), भिवानी से फिजिकल एजुकेशन विषय में पीएचडी की पढ़ाई (PhD Scholar) कर रही हैं।
चोट, प्रेग्नेंसी, पढ़ाई और खेल के संतुलन को साधते हुए सीमा कालीरमन का यह कांस्य पदक देश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
