यरुशलम के संवेदनशील अल-अक्सा परिसर में तनाव: इजरायली मंत्री बेन-गवीर और यहूदी समूहों ने की प्रार्थना, विवाद गहराया
यरुशलम के संवेदनशील अल-अक्सा परिसर में तनाव: इजरायली मंत्री बेन-गवीर और यहूदी समूहों ने की प्रार्थना, विवाद गहराया
यरुशलम: यरुशलम के सबसे संवेदनशील और पवित्र धार्मिक स्थल (अल-हरम अल-शरीफ / टेम्पल माउंट) पर गुरुवार, 23 जुलाई को भारी तनाव देखने को मिला। इजरायल के अति-दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर हजारों यहूदी श्रद्धालुओं और कट्टरपंथियों के साथ इस परिसर में पहुंचे। हथियारबंद पुलिस सुरक्षा के बीच हुए इस दौरे के दौरान वहां प्रार्थना की गई, इजरायल का झंडा फहराया गया और राष्ट्रगान गाया गया, जिसे फलस्तीनी अधिकारियों ने उकसाने वाली कार्रवाई करार दिया है।
’स्टेटस क्वो’ (यथास्थिति) समझौते का उल्लंघन
दशकों पुराने नाजुक अंतर-धार्मिक समझौते ‘स्टेटस क्वो’ के अनुसार, इस परिसर का प्रबंधन इस्लामिक वक्फ बोर्ड के पास है और यहां गैर-मुसलमानों (यहूदियों और ईसाइयों) को जाने की अनुमति तो है, लेकिन सार्वजनिक प्रार्थना करने का अधिकार नहीं है।
एकतरफा बदलाव के आरोप: आलोचकों और फिलिस्तीनी अधिकारियों का आरोप है कि बेन-गवीर लगातार इस समझौते को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने यहूदी श्रद्धालुओं को प्रार्थना सामग्री ले जाने की छूट दी है और यरुशलम पुलिस प्रशासन में अपने करीबियों को नियुक्त कर नियमों में बदलाव किया है।
तिशा ब’आव का अवसर: यह घटनाक्रम यहूदियों के शोक दिवस ‘तिशा ब’आव’ के दिन हुआ, जो 10वीं सदी ईसा पूर्व में नष्ट हुए प्रथम मंदिर और 70 ईस्वी में ध्वस्त दूसरे मंदिर की याद में मनाया जाता है।
बेन-गवीर का बयान और फिलिस्तीन की प्रतिक्रिया
इतामार बेन-गवीर का दावा: घटना के बाद बेन-गवीर ने सोशल मीडिया पर कहा कि वहां यहूदियों के लिए बहुत बड़ी प्रगति हो रही है और प्रार्थना करने वाले ऐसा महसूस कर रहे हैं जैसे वे इस जगह के मालिक हों। वह पहले भी इस परिसर में यहूदी उपासना स्थल (सिनेगॉग) बनाने की इच्छा जता चुके हैं।
लिकुड सांसद की मौजूदगी: इजरायली समाचार पत्र हारेत्ज के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सांसद अमित हलेवी भी इस समूह का हिस्सा थे, जिसने झंडा लहराया।
फिलिस्तीन का तीखा हमला: फिलिस्तीन के धार्मिक और वक्फ मंत्रालय ने कहा कि इजरायल के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व द्वारा की जा रही यह उकसावे वाली कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को एक भीषण ‘धार्मिक युद्ध’ की ओर धकेलने की कोशिश है।
अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक के बेहद करीब हुए इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है।
