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आषाढ़ मासिक दुर्गाष्टमी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और असरदार मंत्र

आषाढ़ मासिक दुर्गाष्टमी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और असरदार मंत्र

​हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से आदि-शक्ति की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

​इस बार आषाढ़ माह की मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 21 जुलाई 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। यह दुर्गाष्टमी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान पड़ रही है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

​मासिक दुर्गाष्टमी 2026: शुभ मुहूर्त

​पंचांग के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि मंगलवार को पूरे दिन रहेगी और अगले दिन यानी बुधवार सुबह 5 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन पूजा के लिए दो सबसे उत्तम मुहूर्त उपलब्ध हैं:

​ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:14 बजे से सुबह 05:00 बजे तक (यह समय ध्यान और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है)।

​अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक।

​मां दुर्गा के सिद्ध मंत्र

​पूजा के दौरान या बाद में इन मंत्रों का शांत मन से जाप करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है:

​मंगल कामना के लिए:

​सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥

​सौभाग्य और आरोग्य के लिए:

​देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

​कष्टों और बाधाओं से मुक्ति के लिए:

​ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥

​शक्ति रूप की स्तुति:

​या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

​मूल मंत्र:

​ॐ दुं दुर्गायै नमः

​सरल पूजा विधि

​मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए इस विधि से पूजा करें:

​शुरुआत: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और साफ-सुथरे (संभव हो तो लाल या पीले) वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।

​वेदी तैयार करें: पूजा घर की सफाई करके गंगाजल छिड़कें। एक चौकी पर नया लाल कपड़ा बिछाकर माता रानी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

​सामग्री अर्पित करें: देवी मां को लाल गुड़हल का फूल, लाल चुनरी, अक्षत (चावल) और सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।

​भोग और दीपक: माता रानी के सामने देसी घी का दीपक जलाएं। उन्हें मेवे, फल, खीर या सूजी के हलवे का भोग लगाएं।

​पाठ और आरती: पूरी श्रद्धा के साथ दुर्गासप्तशती का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती गाएं और ऊपर दिए गए मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।

​व्रत का महत्व

​शास्त्रों के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखने से साधक को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह व्रत घर में खुशहाली लाता है और मानसिक तनाव को दूर करता है। गुप्त नवरात्रि के भीतर आने के कारण इस दिन किए गए दान-पुण्य और विशेष उपायों का फल कई गुना होकर वापस मिलता है।

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