यमुनोत्री हाईवे बहाल: स्यानाचट्टी में 7 दिनों के युद्धस्तरीय कार्य के बाद खुली सड़क, बेली ब्रिज का भी हुआ लोकार्पण
यमुनोत्री हाईवे बहाल: स्यानाचट्टी में 7 दिनों के युद्धस्तरीय कार्य के बाद खुली सड़क, बेली ब्रिज का भी हुआ लोकार्पण
यमुनोत्री धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। लगातार सात दिनों तक चले युद्धस्तरीय मरम्मत कार्य के बाद स्यानाचट्टी में भूस्खलन से क्षतिग्रस्त यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-134) को यातायात के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। हाईवे बहाल होने से चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं, स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों, टैक्सी संचालकों और होटल व्यवसायियों ने राहत की सांस ली है।
मूसलाधार बारिश और भूस्खलन से बह गया था हाईवे का हिस्सा
बीते बृहस्पतिवार को क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश के कारण स्यानाचट्टी के पास भारी भूस्खलन हुआ था। पहाड़ी से गिरे मलबे और पानी के तेज बहाव की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा टूटकर बह गया था, जिससे यमुनोत्री धाम का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया था।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए सीमित आवाजाही सुनिश्चित की। इसके साथ ही हाईवे को दोबारा चालू करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने भारी मशीनों के साथ दिन-रात काम शुरू किया।
सवा करोड़ की लागत से बने बेली ब्रिज का लोकार्पण
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच विभाग ने समय से पहले मार्ग को यातायात के योग्य बना दिया। हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू करने के साथ ही यमुना नदी पर करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से बने 45 मीटर स्पान वाले बेली ब्रिज का भी विधिवत लोकार्पण कर दिया गया है।
यह पुल भविष्य में बरसात और आपदा के समय एक बेहतरीन वैकल्पिक मार्ग साबित होगा, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में मदद मिलेगी और आपात स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना आसान हो सकेगा।
संवेदनशील स्थानों पर रहेगी पैनी नजर
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिशासी अभियंता (EE) मनोज रावत ने बताया कि स्यानाचट्टी में क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत का काम पूरा कर हाईवे को खोल दिया गया है और वर्तमान में यातायात सामान्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मानसून और बरसात के मौसम को देखते हुए इस पूरे मार्ग की लगातार निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील जगहों पर भारी मशीनें और कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
