Monday, September 7, 2026
Latest:
उत्तराखंड

बदरीनाथ मंदिर चोरी विवाद: उत्तराखंड में बढ़ा सियासी पारा, गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष को घेरा, इस्तीफे की मांग

बदरीनाथ मंदिर चोरी विवाद: उत्तराखंड में बढ़ा सियासी पारा, गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष को घेरा, इस्तीफे की मांग

​देहरादून: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम मंदिर के दान में कथित चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के वर्तमान अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (व पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष) गणेश गोदियाल आमने-सामने आ गए हैं।

​मंगलवार को देहरादून प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष के इस्तीफे की पुरजोर मांग की और सरकार पर भ्रष्टाचार को दबाने व विपक्ष को ढाल बनाने का सीधा आरोप लगाया।

​”अपने पाप छिपाने के लिए मेरा नाम ले रहे हैं अध्यक्ष” — गणेश गोदियाल

​प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के नेता गणेश गोदियाल ने वर्तमान बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर तीखा हमला बोला:

​चुनौती और खाली कुर्सी: गोदियाल ने प्रेस के सामने अपने बगल में लगी खाली कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष को आमने-सामने बैठकर दूध का दूध और पानी का पानी करने की चुनौती दी थी, लेकिन वे डर के मारे नहीं आए।

​जांच कमेटी की मांग: उन्होंने कहा कि बीकेटीसी में जारी इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए उनके पुराने कार्यकाल पर कीचड़ उछाला जा रहा है। सरकार को अपनी निष्पक्षता साबित करने के लिए नेता प्रतिपक्ष की अध्यक्षता में विधानसभा की एक विशेष जांच कमेटी का गठन करना चाहिए।

​कर्मचारी की ड्यूटी पर सवाल: आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल का जिक्र करते हुए गोदियाल ने कहा कि उसकी नियुक्ति साल 2003 में हुई थी और वर्तमान चोरी के समय उसकी ड्यूटी उनके कार्यकाल की नहीं थी। अगर उसके खिलाफ पहले कोई जांच हुई थी, तो सरकार ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

​बिनसर मंदिर निर्माण विवाद पर दी सफाई

​अपने पुराने कार्यकाल के दौरान पौड़ी के बिनसर मंदिर निर्माण पर लग रहे आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पूरी क्रोनोलॉजी साझा की:

​बोर्ड की मंजूरी: आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित बिनसर मंदिर की स्थिति काफी दयनीय थी। स्थानीय जनता की मांग पर बीकेटीसी की बोर्ड बैठक में इसके जीर्णोद्धार का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ था, जिसमें तत्कालीन भाजपा सरकार के नामित सदस्य भी शामिल थे।

​सत्ता का दुरुपयोग: साल 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद, भाजपा मंत्री धन सिंह रावत ने कथित तौर पर सत्ता का दुरुपयोग करते हुए पौड़ी के डीएफओ (DFO) के जरिए मंदिर निर्माण कार्य रुकवा दिया। तब तक ₹9 लाख खर्च हो चुके थे, जबकि कुल बजट ₹2.5 से ₹3 करोड़ का था।

​त्रिवेंद्र सरकार का फैसला: बाद में त्रिवेंद्र सरकार ने बीकेटीसी को भंग कर ‘देवस्थानम बोर्ड’ बनाया और दिलचस्प बात यह है कि उसी देवस्थानम बोर्ड की बैठक में त्रिवेंद्र सरकार ने स्वयं इस मंदिर के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था।

​देवस्थानम बोर्ड और पूर्व सीएम के बयान पर तंज

​पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के उस बयान पर भी गोदियाल ने पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीकेटीसी की इन्हीं अव्यवस्थाओं को देखकर देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया था। गोदियाल ने कहा:

​”किसी बोर्ड को भंग कर देने से या नया नाम दे देने से व्यवस्थाएं ठीक नहीं होतीं। व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। मेरे कार्यकाल में कभी भी चोरी या गबन का ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया।”

​एसआईटी (SIT) की जांच जारी

​राजनीतिक बयानबाजी के बीच, बदरीनाथ मंदिर के दान में हुई इस कथित चोरी की जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एसआईटी की टीम ने बदरीनाथ मंदिर परिसर के भीतर उस विशिष्ट क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया जहां दान की रकम की गिनती (Cash Counting) की जाती है। टीम ने वहां रखे मुख्य कैश रजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक व दस्तावेजी रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, ताकि सच सामने आ सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *