ईंधन नीति पर महासंग्राम: अरविंद केजरीवाल ने शुरू किया “स्टॉप E20 पेट्रोल” देशव्यापी अभियान, मोदी सरकार पर साधा निशाना
ईंधन नीति पर महासंग्राम: अरविंद केजरीवाल ने शुरू किया “स्टॉप E20 पेट्रोल” देशव्यापी अभियान, मोदी सरकार पर साधा निशाना
देश की वर्तमान ईंधन नीति को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और केंद्र सरकार के बीच एक नया सियासी और तकनीकी विवाद छिड़ गया है। अरविंद केजरीवाल ने देश में बिना तैयारियों के जबरन लागू किए जा रहे E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण) के खिलाफ एक बड़े देशव्यापी ऑनलाइन सिग्नेचर अभियान “स्टॉप E20 पेट्रोल” (StopE20petrol.com) की शुरुआत की है। इस सिलसिले में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर मिलने का समय भी मांगा है।
अरविंद केजरीवाल का अभियान और सरकार से मांगें
अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में दिल्ली के कई पेट्रोल पंपों और ऑटो सर्विस स्टेशनों का दौरा करने के बाद इस अभियान का ऐलान किया। उन्होंने सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें रखी हैं:
ईंधन चुनने का विकल्प मिले: केजरीवाल का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को केवल E20 पेट्रोल खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। इसके बजाय वाहन मालिकों को शुद्ध पेट्रोल (E0), E10 और E20 तीनों तरह के ईंधन चुनने का पूरा विकल्प मिलना चाहिए।
कीमतें कम की जाएं: एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता कम होती है, जिससे वाहनों का माइलेज घट जाता है। उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले इस दोहरे वित्तीय बोझ को कम करने के लिए E20 पेट्रोल की कीमतें सामान्य पेट्रोल से काफी कम होनी चाहिए।
जनता की आवाज़ सुने सरकार: केजरीवाल ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन मोदी सरकार ग्राहकों को विकल्प देने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रही है।
एथेनॉल मिश्रण पर क्यों छिड़ा है यह बड़ा बवाल?
E20 पेट्रोल का यह पूरा मामला वर्तमान में वाहन चालकों की जेब, गाड़ियों की सेहत और राजनीति के बीच एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। दोनों पक्षों के अपने-अपने मजबूत तर्क हैं:
1. उपभोक्ताओं और विपक्ष का दावा (गाड़ियों को नुकसान)
माइलेज में भारी गिरावट: वाहन मालिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज अचानक बहुत कम हो गया है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है।
इंजन में खराबी: एथेनॉल प्रकृति में संक्षारक (Corrosive) होता है और हवा से नमी सोखता है। मैकेनिकों और वाहन मालिकों के अनुसार, इसके कारण पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पंप जाम होने, इंजेक्टर खराब होने, पाइप गलने और इंजन में अत्यधिक वाइब्रेशन (नॉकिंग) जैसी गंभीर समस्याएं आ रही हैं।
करोड़ों गाड़ियां खतरे में: केजरीवाल का दावा है कि देश में लगभग 22 करोड़ बाइक और 8 करोड़ कारें ऐसी हैं जो इस नए ईंधन के अनुकूल (Compatible) नहीं हैं और इसके जबरन इस्तेमाल से कबाड़ में तब्दील हो सकती हैं।
कीमत पर सवाल: एथेनॉल की उत्पादन लागत कच्चे तेल से कम है, लेकिन पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के बाद भी जनता से सामान्य पेट्रोल जितनी ही पूरी कीमत वसूली जा रही है।
2. केंद्र सरकार का रुख और तर्क (देशहित और पर्यावरण)
केंद्रीय मंत्रियों (नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी) तथा पेट्रोलियम मंत्रालय ने विपक्ष और उपभोक्ताओं के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार का पक्ष मजबूत किया है:
विदेशी मुद्रा की भारी बचत: सरकार के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण भारत को अब तक लगभग 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम करना पड़ा है, जिससे ₹1.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
किसानों को सीधा फायदा: आयात की जो भारी-भरकम रकम पहले विदेशों में जाती थी, उसका एक बड़ा हिस्सा अब गन्ने, मक्के और कृषि अवशेषों से एथेनॉल बनाने वाले देश के किसानों के पास जा रहा है।
स्वच्छ पर्यावरण: E20 ईंधन से चलने वाले वाहनों में कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है, जो भारत के नेट-जीरो और स्वच्छ पर्यावरण के लक्ष्यों के लिए बेहद जरूरी है।
परीक्षण के बाद लागू: नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन को ARAI (Automotive Research Association of India) द्वारा गहन परीक्षण के बाद ही बाजार में उतारा गया है। गाड़ियों के खराब होने की वजह ईंधन में मिलावट हो सकती है, न कि एथेनॉल। सरकार का मानना है कि माइलेज में केवल 3% से 5% की मामूली गिरावट आ सकती है, 30-40% के दावे पूरी तरह गलत हैं।
वर्तमान स्थिति: अनिवार्यता बरकरार
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि E20 पेट्रोल ही देश का स्टैंडर्ड ईंधन रहेगा और पेट्रोल पंपों पर अलग से शुद्ध पेट्रोल (E0) बेचने की कोई योजना नहीं है। इस अनिवार्यता से बचने के लिए कई लोग अब महंगे ‘प्रीमियम पेट्रोल’ (जैसे XP95 या स्पीड) की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
अरविंद केजरीवाल द्वारा शुरू किए गए StopE20Petrol.com अभियान और वाहन निर्माता कंपनियों को लिखे गए पत्रों ने इस तकनीकी मुद्दे को अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप दे दिया है। आप कार्यकर्ताओं और आम जनता से वाहनों को होने वाले नुकसान के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की गई है, जिससे सरकार पर अपनी नीति की समीक्षा करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
