होर्मुज विवाद: “अमेरिकी आक्रामकता से नहीं खुलेगा रास्ता” — ईरानी सेना का कड़ा रुख
होर्मुज विवाद: “अमेरिकी आक्रामकता से नहीं खुलेगा रास्ता” — ईरानी सेना का कड़ा रुख
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध अब चरम पर पहुंच चुका है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अपने अधिकारों से रत्ती भर भी पीछे नहीं हटेगा और युद्ध या आक्रामकता के बल पर अमेरिका इस रणनीतिक जलमार्ग को कभी नहीं खुलवा सकता।
1. युद्ध और आक्रामकता का रास्ता मंजूर नहीं
तेहरान के दक्षिणी इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ब्रिगेडियर जनरल अकरमिनिया ने दो टूक कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कभी भी युद्ध, आक्रामकता या अमेरिकी मनमानी के जरिए नहीं खोला जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रूट को दोबारा खोलने का एकमात्र रास्ता यही है कि अमेरिका ईरानी राष्ट्र के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करे और दोनों देशों के बीच हुए युद्ध-समाप्ति समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन करे।
2. ‘इस्लामाबाद समझौते’ के उल्लंघन का आरोप
ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिका पर हाल ही में हुए इस्लामाबाद युद्ध-समाप्ति समझौते (MoU) के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया।
उनका दावा है कि इस समझौते के तहत होर्मुज में समुद्री यातायात (नेविगेशन) की पूरी जिम्मेदारी और नियंत्रण व्यवस्था ईरान को सौंपी गई थी।
इसके बावजूद, अमेरिका होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में एक नया और अनाधिकृत शिपिंग रूट स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जो समझौते की शर्तों के खिलाफ है।
3. जनता के समर्थन और शहीदों को नमन
अकरमिनिया ने पिछले चार महीनों के भीषण सैन्य टकराव के दौरान ईरानी सशस्त्र बलों को मिले आम जनता के अटूट समर्थन की जमकर सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने हालिया संघर्ष में मारे गए वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और सर्वोच्च नेताओं की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ईरानी सेना आखिरी सांस तक देश के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
4. ट्रंप का ‘मालिक’ होने का दावा और 20% टैक्स
ईरानी सेना का यह आक्रामक बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद ऐलान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका इस क्षेत्र में “गार्जियन ऑफ द होर्मुज स्ट्रेट” की भूमिका में है। ट्रंप ने इस रूट की सुरक्षा का हवाला देते हुए यहाँ से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों से 20 फीसदी सुरक्षा फीस (ट्रांजिट टैक्स) वसूलने का प्रस्ताव रखा है।
ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि होर्मुज पर केवल उसका भौगोलिक और कानूनी अधिकार है, जिसे किसी भी बाहरी ताकत के दबाव में नहीं छोड़ा जाएगा।
