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वित्तीय संकट की मार: पाकिस्तान में मानसून बाढ़ की अधूरी तैयारियों ने बढ़ाई चिंता, गिलगित-बाल्टिस्तान में भारी तबाही

वित्तीय संकट की मार: पाकिस्तान में मानसून बाढ़ की अधूरी तैयारियों ने बढ़ाई चिंता, गिलगित-बाल्टिस्तान में भारी तबाही

​पाकिस्तान में मानसून की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के मौजूदा गंभीर वित्तीय संकट के कारण इस साल मानसून और संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियां अधूरी पड़ी हैं, जिससे प्रशासन और आम जनता की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

​खाली खजाना और अधूरी तैयारियां: रावलपिंडी का हाल

​पाकिस्तानी अखबार ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित बाढ़ से निपटने के लिए किए जाने वाले ठोस सुरक्षात्मक उपाय अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।

​फंड की कमी: देश के चल रहे वित्तीय संकट के कारण मानसून की तैयारियों और राहत कार्यों के लिए जरूरी सरकारी फंड अब तक जारी नहीं किए जा सके हैं।

​रावलपिंडी में खतरा: रावलपिंडी के कई प्रमुख नालों से इस बार गाद (सफाई) तक नहीं निकाली गई है। खतरे को देखते हुए लेह नाला इलाके के निवासियों को अस्थाई तौर पर दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया गया है, जबकि निचले इलाकों के लोग खुद ही अपने कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।

​कमजोर इमारतों का संकट: जिन जर्जर मकानों और दुकानों की छतें टपक रही हैं या दीवारें कमजोर हैं, उन्हें प्रशासन द्वारा खाली करने के नोटिस तो दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। हर साल मानसून में ऐसी कुछ इमारतें ढह जाती हैं। प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले ये नोटिस सिर्फ हादसों के बाद खुद का बचाव करने का जरिया बनकर रह गए हैं।

​कोर्ट में लंबित मामले: खाली करने के नोटिसों से जुड़े कई मामले अदालतों में लंबित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, किराएदारों के साथ कथित मिलीभगत के कारण सरकार इन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर पाती, जिससे ये मामले बार-बार टलते रहते हैं।

​गिलगित-बाल्टिस्तान में अचानक आई बाढ़ से हाहाकार

​दूसरी ओर, पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) क्षेत्र से भारी तबाही की खबरें आ रही हैं। मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने वहां जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

​पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के अनुसार, गिलगित-बाल्टिस्तान डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (जीबीडीएमए) ने बताया कि डायमर जिले में छह अलग-अलग स्थानों पर अचानक भयानक बाढ़ आ गई।

​हाईवे और संपर्क मार्ग ठप: ऐतिहासिक काराकोरम हाईवे (KKH) को बाढ़ के कारण भारी नुकसान पहुंचा है। थोर वैली में मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह जाने के कारण यातायात पूरी तरह से रोक दिया गया है, जिससे हजारों लोग फंसे हुए हैं।

​घरों और बुनियादी ढांचे को नुकसान: बाढ़ का मलबा लोगों के घरों में घुस गया है। कई इलाकों में बिजली के खंभे और ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाने से पूरी तरह ब्लैकआउट (अंधेरा) छाया हुआ है। खानबारी इलाके में आई बाढ़ इतनी भीषण थी कि वहां लोगों के घर, घरेलू सामान और मवेशी तक बह गए।

​डैम प्रोजेक्ट को भारी नुकसान: डायमर-भाषा डैम प्रोजेक्ट पर काम कर रही एक निजी कंपनी को इस प्राकृतिक आपदा में भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। बाढ़ के तेज बहाव में कंपनी के 13 डंपर, एक एक्सकेवेटर, एक क्रशिंग प्लांट और दो पानी के टैंकर बह गए, जिसके बाद डैम का निर्माण कार्य फिलहाल पूरी तरह रुक गया है।

​प्रभावित लोगों ने लगाई मदद की गुहार

​गिलगित-बाल्टिस्तान के प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों ने पाकिस्तान सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (GBDMA) से तत्काल मदद की अपील की है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत अभियान शुरू किया जाए, बंद पड़ी सड़कों और बिजली आपूर्ति को बहाल किया जाए, तथा बेघर हुए परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए।

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