महाराष्ट्र की सियासत में हलचल: क्या NDA की तरफ बढ़ रहे हैं शरद पवार? MVA में अविश्वास की खाई गहरी
महाराष्ट्र की सियासत में हलचल: क्या NDA की तरफ बढ़ रहे हैं शरद पवार? MVA में अविश्वास की खाई गहरी
मुंबई: संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले देश की राजनीति में बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे खेमे के कुछ सांसदों द्वारा पाला बदलकर एनडीए (NDA) का दामन थामने के बाद, अब महाराष्ट्र की सियासत में एक नया यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है—”आखिर शरद पवार का रुख क्या होगा?”
बीते कुछ दिनों में वरिष्ठ नेता शरद पवार की कुछ गतिविधियों और बयानों ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी कयासों का बाजार गर्म कर दिया है, जिसके चलते महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन के भीतर भी आपसी टकराव और अविश्वास खुलकर सामने आने लगा है.
कयासों को हवा देने वाली दो बड़ी वजहें
राजनीतिक गलियारों में शरद पवार के बदले मिजाज को भांपने की कोशिशें मुख्य रूप से दो घटनाओं के बाद तेज हुई हैं:
एकनाथ शिंदे से औचक मुलाकात: शरद पवार ने अचानक राज्य के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के दफ्तर जाकर उनसे मुलाकात की. इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद से ही कयास लग रहे हैं कि क्या पवार की पार्टी आने वाले दिनों में रुख बदलकर एनडीए (NDA) के पाले में जा सकती है.
देवेंद्र फडणवीस सरकार की तारीफ: महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने हाल ही में किसानों की कर्जमाफी के फैसले में से दो कड़े नियमों (शर्तों) को हटा दिया. शरद पवार ने विपक्ष में होने के बावजूद सरकार के इस फैसले की खुलकर तारीफ की, जिसने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है.
सियासी मायने: केंद्र में सत्तासीन भाजपा संसद में अपना समर्थन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है. ऐसे में शरद पवार की इन नरमी भरी हरकतों को भाजपा की कोशिशों के असर के रूप में देखा जा रहा है.
महाविकास अघाड़ी (MVA) में बढ़ा तनाव, उठे सवाल
भले ही शरद पवार का अगला कदम क्या होगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन उनकी इस ‘सद्भावना’ ने MVA साथियों के कान खड़े कर दिए हैं.
पृथ्वीराज चव्हाण का बड़ा दावा: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस पूरी स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ कहा, “महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा लगता है कि पर्दे के पीछे कुछ ‘चर’ रहा है. शरद पवार की एकनाथ शिंदे से यह मुलाकात अचानक नहीं हुई है, जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है.”
संजय राउत की आपत्ति: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने भी इस मुलाकात के समय और मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
सुप्रिया सुले का पलटवार: ‘उद्धव सेना’ को दिलाई 17 दिन पुरानी बात याद
इस पूरे विवाद पर जब शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे ‘प्याली में उठा तूफान’ करार देते हुए खारिज कर दिया. हालांकि, पृथ्वीराज चव्हाण ने इस पर भी तंज कसते हुए कहा कि सुप्रिया सुले कह रही हैं तो हम मान लेते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी लगती नहीं है.
उद्धव ठाकरे की पार्टी (शिवसेना UBT) द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर सुप्रिया सुले बेहद तल्ख नजर आईं और उन्होंने पलटवार करते हुए कहा:
अजित पवार से मुलाकात का जिक्र: सुप्रिया सुले ने याद दिलाया कि जब अजित पवार उनकी पार्टी से अलग हुए थे, तो उसके महज 17 दिन बाद ही उद्धव ठाकरे ने जाकर अजित पवार से मुलाकात की थी.
हमने सवाल नहीं उठाए थे: उन्होंने कहा, “जब उद्धव जी ने अजित दादा से मुलाकात की थी, तब हमने कोई सवाल नहीं उठाया. हमारा मानना था कि अजित दादा एक संवैधानिक पद पर हैं और उनसे मिलना गलत नहीं है. तो फिर आज पवार साहब की शिंदे जी से मुलाकात पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?”
संवाद लोकतंत्र की खूबसूरती: सुप्रिया सुले ने साफ किया कि एक मजबूत और स्वस्थ लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच संवाद होना बेहद जरूरी है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
निष्कर्ष: एक तरफ जहां सुप्रिया सुले इसे केवल एक सामान्य लोकतांत्रिक संवाद बता रही हैं, वहीं MVA के सहयोगियों का बढ़ता अविश्वास यह साफ कर रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में अंदर ही अंदर किसी बड़े सियासी भूचाल की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है.
