मृत्यु से पहले ‘दिव्य दृष्टि’: गरुड़ पुराण में छिपा है मौत का रहस्य
मृत्यु से पहले ‘दिव्य दृष्टि’: गरुड़ पुराण में छिपा है मौत का रहस्य
नई दिल्ली: सनातन परंपरा के 18 महापुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है। इस पौराणिक ग्रंथ में जीवन, मृत्यु, आत्मा, कर्म और परलोक से जुड़े अनेक गंभीर विषयों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। विशेष रूप से मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा और कर्मों के फल का वर्णन इस ग्रंथ की प्रमुख विशेषताओं में से एक माना जाता है, जो सदियों से मानव जिज्ञासा का केंद्र रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निकट आती है, तो उसके शरीर और इंद्रियों में धीरे-धीरे बड़े परिवर्तन होने लगते हैं। गरुड़ पुराण में वर्णन है कि मृत्यु के अंतिम क्षणों में व्यक्ति को एक विशेष ‘दिव्य दृष्टि’ प्राप्त होती है। इस अवस्था में व्यक्ति के सामने उसके पूरे जीवन की स्मृतियां उभरने लगती हैं। वह अपने द्वारा किए गए अच्छे और बुरे कर्मों का मानो पुनः अवलोकन करता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इस समय व्यक्ति कुछ बोलना तो चाहता है, लेकिन शारीरिक शक्ति क्षीण होने के कारण उसकी वाणी साथ नहीं देती और वह भीतर ही भीतर कई अनुभूतियों से गुजरता है।
इस ग्रंथ में यमदूतों और देवदूतों का भी स्पष्ट वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि पुण्य कर्म करने वाले लोगों को अंतिम समय में अत्यंत शांत और प्रकाशमय अनुभव होता है, और देवदूत उन्हें आदरपूर्वक ले जाते हैं। इसके विपरीत, पाप कर्मों में लिप्त रहने वाले लोगों को तीव्र भय और अशांति का सामना करना पड़ता है, और यमदूत उन्हें यमलोक की कठिन यात्रा पर ले जाते हैं, जहां उन्हें वैतरणी नदी और अपने दुष्कर्मों के भयानक फल का सामना करना पड़ता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इन आध्यात्मिक बातों की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन हिंदू धार्मिक साहित्य में जीवन और कर्म के महत्व को समझाने के लिए गरुड़ पुराण को आज भी सर्वोपरि माना जाता है।
