पीओके में भारी बवाल: शटर-डाउन हड़ताल के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़प, इंटरनेट 30 दिनों से ठप
पीओके में भारी बवाल: शटर-डाउन हड़ताल के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़प, इंटरनेट 30 दिनों से ठप
मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर की गई शटर-डाउन स्ट्राइक (हड़ताल) और विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। पीओके के कई इलाकों, विशेष रूप से मीरपुर और मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुई हैं। इन झड़पों में कई पुलिसकर्मियों सहित करीब एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
मीरपुर में झड़पें और महिलाओं का प्रदर्शन
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की शुरुआत मीरपुर जिले के ददयाल शहर के अंब गांव से हुई। यहां प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस के साथ पहली झड़प हुई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। इसके बाद शाम को खलीकाबाद और एयरपोर्ट चौक के पास भी झड़पें हुईं। मीरपुर डिविजनल हेडक्वार्टर हॉस्पिटल के अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल लाए गए घायलों में से दो की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
हिंसा के बीच मीरपुर के खलीकाबाद, इस्लामगढ़ और चकसवारी इलाकों में महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। वहीं, भीमबेर की समाहनी घाटी और बरनाला सबडिवीजन के मोयेल गांव में महिलाओं और बच्चों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं।
मुजफ्फराबाद में पसरा सन्नाटा, दागे गए आंसू गैस के गोले
हड़ताल के चलते मुजफ्फराबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे गए:
बाजार और सड़कें सुनसान: मुजफ्फराबाद के लगभग सभी प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सड़कों से नदारद था और निजी वाहनों की आवाजाही भी न के बराबर रही, जिससे सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
फ्लैग मार्च और गिरफ्तारियां: स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों में फ्लैग मार्च किया। हालांकि, एयरपोर्ट चौक पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए चार पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया।
पथराव और धरना: तारिकाबाद और लोअर चत्तर इलाकों में युवाओं द्वारा पहाड़ियों से पत्थर फेंकने और सड़क जाम करने की कोशिश के बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। इसके विरोध में स्थानीय नागरिकों ने पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ सड़क पर ही धरना देना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में सड़क किनारे खाई में दर्जनों मोटरसाइकिलें, टूटा हुआ फर्नीचर और क्षतिग्रस्त वाहन बिखरे नजर आए।
सरकार को 8 जुलाई तक की आखिरी डेडलाइन
पीओके के पुंछ डिवीजन के शुजाबाद, हजीरा, मुत्यालमेरा, पनिओला और अब्बासपुर में भी प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। रविवार शाम को आयोजित एक आपातकालीन बैठक में जेएएसी (JAAC) कोर कमेटी के सदस्य इम्तियाज असलम ने सरकार को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने समूह के ‘मांगों के चार्टर’ को लागू करने और मौजूदा गतिरोध को सुलझाने के लिए 8 जुलाई 2026 तक की अंतिम समयसीमा (डेडलाइन) दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 9 जुलाई को धरने का एक महीना पूरा होने पर अगले बड़े कदम का ऐलान किया जाएगा।
30 दिनों से इंटरनेट पूरी तरह बंद
इस पूरे क्षेत्र में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। रविवार को पीओके में इंटरनेट ब्लैकआउट का 30वां दिन था, जिससे स्थानीय लोगों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गया है।
क्यों सुलग रहा है पीओके?
पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा गत 5 जून को जेएएसी को एक ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित किए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र में अशांति और ज्यादा भड़क गई है। जेएएसी लंबे समय से सरकार के सामने कई मांगें रख रहा है। इनमें सबसे प्रमुख मांग पीओके की लेजिस्लेटिव असेंबली (विधानसभा) से उन 12 सीटों को पूरी तरह खत्म करना है, जो पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित (रिजर्व) की गई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जाता है।
