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लोक कला जगत में शोक की लहर: पद्म विभूषण तीजन बाई का 70 साल की उम्र में निधन, रायपुर एम्स में ली आखिरी सांस

लोक कला जगत में शोक की लहर: पद्म विभूषण तीजन बाई का 70 साल की उम्र में निधन, रायपुर एम्स में ली आखिरी सांस

​भारतीय लोक कला जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर है। पंडवानी की दिग्गज और विश्व प्रसिद्ध कलाकार तीजन बाई का 70 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उन्होंने रायपुर के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में शनिवार रात (तड़के) 3:15 बजे अपनी आखिरी सांस ली, जहां वे पिछले कई हफ्तों से भर्ती थीं। सुबह के समय उनकी हालत बिगड़ने के बाद एम्स के डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि की।

​भारतीय लोक कला में उनके असाधारण और ऐतिहासिक योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

​तीजन बाई के निधन का कारण

​सांस लेने में तकलीफ और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने के बाद तीजन बाई को इसी साल 27 मई को रायपुर के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दिग्गज गायिका का इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक, वह पहले से मौजूद कई गंभीर बीमारियों (को-मॉर्बिटीज) के साथ-साथ उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शनिवार तड़के करीब 3:15 बजे अचानक उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

​मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने दी भावुक श्रद्धांजलि

​छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने रविवार को तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य की संस्कृति को वैश्विक पटल पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री का यह बयान आईआईएम (IIM) रायपुर में आयोजित दो दिवसीय कैबिनेट ‘चिंतन शिविर’ के समापन के दौरान आया।

​मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा: “आज श्रीमती तीजन बाई का निधन हो गया है। उन्हें पद्म श्री और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। पंडवानी (लोक गायन) के जरिए उन्होंने छत्तीसगढ़ को देश और पूरी दुनिया में मशहूर किया। मैं उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले। ईश्वर उनके शोक संतप्त परिवार को इस गहरे दुख को सहने की शक्ति दे।”

​देश-विदेश में ‘पंडवानी’ को दिलाई पहचान, मिले कई प्रतिष्ठित सम्मान

​तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक गायन शैली ‘पंडवानी’ की सबसे बड़ी हस्ताक्षर थीं। इस शैली का शाब्दिक अर्थ ‘पांडवों की कहानियां या गीत’ पेश करना होता है। वह अपने अनोखे संगीतमय अंदाज और हाथ में तंबूरा लेकर महाभारत की कहानियां सुनाती थीं। यह कला शैली छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बेहद लोकप्रिय है।

​अपने जीवनकाल में तीजन बाई को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया:

​पद्म विभूषण: साल 2019 में देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला।

​फुकुओका पुरस्कार: साल 2018 में इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।

​पद्म भूषण: साल 2003 में कला के क्षेत्र में मिला।

​संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार: साल 1995 में सम्मानित किया गया।

​पद्म श्री: साल 1988 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया।

​तीजन बाई के निधन से भारतीय लोक संगीत और संस्कृति के एक सुनहरे अध्याय का अंत हो गया है, जिसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है।

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