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पुतिन की भारत को पेशकश: सुखोई Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन का दिया सुझाव

पुतिन की भारत को पेशकश: सुखोई Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन का दिया सुझाव

​रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को रूस का पांचवीं पीढ़ी का अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई एसयू-57 (Su-57) देने की पेशकश की है। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के मजबूत रणनीतिक संबंधों को देखते हुए भारत में ही इस विमान का संयुक्त उत्पादन करने का सुझाव भी दिया है।

​क्या है Su-57 फाइटर जेट और क्यों बना रूस की पसंद?

​सुखोई Su-57 रूस का पहला ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे ‘प्रोसपेक्टिव एवियशन कॉम्पलेक्स ऑफ फ्रंटलाइन एवियशन’ (PAK FA) प्रोग्राम के तहत विकसित किया गया है। नाटो (NATO) इस विमान को ‘फेलॉन’ (Felon) कोडनेम से बुलाता है।

​रूस ने इस जेट को अमेरिकी लड़ाकू विमानों F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग II को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया है। इसकी मुख्य खासियतें इस प्रकार हैं:

​बहुउद्देशीय क्षमता: यह जेट आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक हमला करने में सक्षम है।

​रफ्तार और सुपरक्रूज: यह ट्विन-इंजन जेट मैक 2.0 (लगभग 2,458 किमी/घंटा) की टॉप स्पीड तक पहुंच सकता है। यह बिना आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल किए मैक 1.3 की स्पीड पर सुपरक्रूज (लगातार तेज उड़ान) बनाए रख सकता है, जिससे ईंधन की भारी बचत होती है।

​कॉम्बैट रेंज: ईंधन दक्षता के चलते यह जेट मिशन के दौरान लगभग 1,900 किलोमीटर की लंबी कॉम्बैट रेंज बनाए रखता है।

​लागत: अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025-2026 में एक Su-57 जेट को बनाने की फ्लाईअवे लागत लगभग 35 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच आती है।

​तकनीकी तुलना: Su-57 (रूस) बनाम F-35 (अमेरिका)

​भूमिका और चालक दल: दोनों ही बहुउद्देशीय स्टील्थ लड़ाकू विमान हैं और दोनों में 1 पायलट (क्रू) की जगह होती है।

​अधिकतम रफ्तार और रेंज: रूसी Su-57 की अधिकतम रफ्तार मैक 2.0 है, जबकि अमेरिकी F-35 की रफ्तार मैक 1.6 है। Su-57 का कॉम्बैट रेडियस 1,500 किलोमीटर है, जबकि F-35 का 1,100 किलोमीटर है।

​स्टील्थ डिजाइन और इंजन: Su-57 में आंशिक (फ्रंटल फोकस) स्टील्थ है और यह 2 इंजन (AL-41 / इजडेलिये 30) से लैस है। वहीं F-35 में पूर्ण-स्पेक्ट्रम स्टील्थ है और यह 1 इंजन (F135) पर काम करता है। दोनों ही विमानों में आंतरिक और बाहरी हथियार लोड करने की सुविधा है।

​लागत और सर्विस: F-35 वर्ष 2015 से सर्विस में है और इसकी प्रति यूनिट लागत 80 से 100 मिलियन डॉलर है, जबकि इसके प्रति उड़ान घंटे का खर्च 33,000 डॉलर आता है। इसके मुकाबले Su-57 की सर्विस एंट्री सीमित (2020 का दशक) है, इसकी प्रति यूनिट लागत 35 से 50 मिलियन डॉलर है और प्रति उड़ान घंटे का खर्च लगभग 25,000 डॉलर आता है।

​दुनिया के 5 सबसे महंगे फाइटर जेट (2026 के आंकड़ों के अनुसार)

​ग्लोबल मिलिट्री डॉट नेट के अनुसार, दुनिया के पांच सबसे महंगे लड़ाकू विमानों की सूची और उनकी प्रति यूनिट लागत इस प्रकार है:

​लॉकहीड मार्टिन एफ-22 रैप्टर (अमेरिका) – 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर

​बोइंग एफ-15ईएक्स ईगल II (अमेरिका) – 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर

​डसॉल्ट राफेल (फ्रांस) – 115 मिलियन अमेरिकी डॉलर

​चेंगदू जे-20 माइटी ड्रैगन (चीन) – 110 मिलियन अमेरिकी डॉलर

​मित्सुबिशी एफ-2 (जापान) – 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर

​भारत-रूस रक्षा संबंध और भारत का स्वदेशी रुख

​दशकों से रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन हालिया यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों और हथियारों की डिलीवरी में हुई देरी ने नई दिल्ली को अपनी सैन्य रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। भारत अब अपनी सैन्य खरीद का आक्रामक रूप से विविधीकरण कर रहा है।

​भारत और रूस के बीच लगभग 15 वर्षों तक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FGFA) के संयुक्त विकास को लेकर बातचीत चली थी। लेकिन 2021 में भारत ने इस प्रोजेक्ट की अत्यधिक अनुमानित लागत (लगभग 30 अरब डॉलर या 2 लाख करोड़ रुपये) के कारण इससे दूरी बना ले थी। अब भारत अपनी महत्वाकांक्षी ‘एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) परियोजना पर काम कर रहा है, जो देश का सबसे बड़ा स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम है। ऐसे में पुतिन की इस नई पेशकश पर भारत का अगला कदम काफी महत्वपूर्ण होगा।

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