टीएमसी को बड़ा झटका: राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और संसद सदस्यता से दिया इस्तीफा
टीएमसी को बड़ा झटका: राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और संसद सदस्यता से दिया इस्तीफा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बड़े संगठनात्मक और राजनीतिक संकट का सामना कर रही सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोमवार को एक और करारा झटका लगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता और संसद के उच्च सदन में टीएमसी की सबसे मुखर आवाजों में से एक रहे सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी छोड़ने का भी ऐलान कर दिया है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
सुखेंदु शेखर राय का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह चरम पर है। हाल ही में पार्टी के विधायकों के एक बड़े समूह ने विद्रोह करते हुए विधायक दल पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिसे टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
”बिचौलियों और चोरों ने ली कर्मठ कार्यकर्ताओं की जगह” – सुखेंदु शेखर रॉय
पार्टी और संसद छोड़ने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने टीएमसी नेतृत्व और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा:
सत्ता का घमंड: “टीएमसी पर पावर का नशा इस हद तक चढ़ गया था कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई उन्हें छू नहीं सकता। लेकिन जिन लोगों ने उन्हें सत्ता में भेजा, उन्हीं ने अब उन्हें नीचे गिरा दिया है।”
जमीनी हकीकत से दूरी: “पिछले 15 सालों से सत्ता में बैठे मंत्रियों, मेयरों, पार्षदों और पंचायत नेताओं तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। वे पूरी तरह जमीनी हकीकत से कट चुके थे।”
अपराधियों को बढ़ावा: “पार्टी के जिन कार्यकर्ताओं ने अपने खून-पसीने से संगठन को मजबूत किया और सालों तक लेफ्ट फ्रंट के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें किनारे कर दिया गया। उनकी जगह बिचौलिए, चोर, डकैत और बलात्कारी सामने आ गए।”
आरजी कर कांड पर फूटा गुस्सा
आरजी कर अस्पताल में हुई रेप और मर्डर की घटना का जिक्र करते हुए रॉय ने कहा कि इस घटना ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया। जो लोग कभी किसी राजनीतिक जुलूस या बैठक में शामिल नहीं हुए थे, वे डॉक्टर और आम नागरिक पूरी-पूरी रात सड़कों पर डटे रहे। लेकिन उस समय भी सरकार और नेताओं ने इस पर कोई गंभीर सोच-विचार या चर्चा नहीं की। उन्होंने मांग की कि टीएमसी के मौजूदा नेताओं की संपत्तियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दो साल पहले ही दी थी संगठन टूटने की चेतावनी
इस्तीफा देने से पहले एक टीवी चैनल से बातचीत में सुखेंदु शेखर राय ने कहा था कि विधानसभा में जिस बड़े पैमाने पर असंतोष सामने आया है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में आरजी कर अस्पताल मामले के दौरान ही उन्होंने संगठन में बिखराव की आशंका जता दी थी।
उन्होंने चेतावनी दी कि विधायकों के इस विद्रोह का असर आने वाले महीनों में लोकसभा के भीतर टीएमसी सांसदों पर भी देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुखेंदु शेखर राय जैसे कद्दावर नेता के जाने से तृणमूल कांग्रेस का संकट और गहरा सकता है।
