उत्तराखंड

हरिद्वार के मदरसों में बड़ा खेल: जांच शुरू होते ही कागजों से ‘गायब’ हुए 12 हजार बच्चे, एक ही शख्स चला रहा था 6 मदरसे, DM ने बैठाई जांच

हरिद्वार के मदरसों में बड़ा खेल: जांच शुरू होते ही कागजों से ‘गायब’ हुए 12 हजार बच्चे, एक ही शख्स चला रहा था 6 मदरसे, DM ने बैठाई जांच

​हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में संचालित हो रहे मदरसों में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी योजनाओं और फंड का अनुचित लाभ उठाने के लिए मदरसों में बच्चों की संख्या को कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा था। लेकिन जैसे ही शासन-प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए जांच शुरू की, रिकॉर्ड से अचानक करीब 12,000 बच्चे गायब हो गए।

​पहले जहां इन मदरसों में छात्रों की संख्या 31,000 दर्ज थी, वह अब घटकर महज 19,000 रह गई है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की संख्या गिरने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी (DM) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी गठित कर दी है।

​व्हाट्सएप ग्रुप बनते ही पकड़ में आई धांधली

​इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब शुरू हुआ जब शिक्षा विभाग ने मॉनिटरिंग के लिए एक अनूठा तरीका अपनाया:

​18 अप्रैल को जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) अमित कुमार चंद ने रुड़की में मदरसा संचालकों की बैठक ली।

​पारदर्शिता के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया और निर्देश दिए गए कि रोजाना मिड-डे-मील (MDM) बनने से लेकर बच्चों के खाना खाने तक की फोटो और वीडियो ग्रुप पर अपलोड करनी होगी।

​इस आदेश के बाद 11 मदरसों ने एक भी फोटो-वीडियो अपलोड नहीं की। खुद को जांच के घेरे में फंसता देख इन संचालकों ने तुरंत मिड-डे-मील बंद करने का आवेदन दे दिया।

​एक नाम पर 3 मदरसे, कागजों में चल रहे थे 6

​विभाग की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, चौंकाने वाले मामले सामने आए। सुल्तानपुर क्षेत्र में एक ही व्यक्ति तीन मदरसे संचालित कर रहा था। इतना ही नहीं, उसने कागजों पर इन तीन मदरसों को छह दिखाया हुआ था—जिसमें तीन को जूनियर और तीन को प्राइमरी के नाम पर रजिस्टर्ड कर सरकारी बजट ठिकाने लगाया जा रहा था। फिलहाल इनका मिड-डे-मील फंड रोक दिया गया है।

​कार्रवाई के डर से 10 मदरसे बंद करने की नौबत

​लक्सर तहसील क्षेत्र में हुई शुरुआती जांच में 131 में से 23 मदरसों में भारी अनियमितता पाई गई, जिसके बाद उनके मिड-डे-मील और अन्य सरकारी फंड पर तत्काल रोक लगा दी गई।

​कार्रवाई का खौफ: पकड़े जाने के डर से 10 मदरसा संचालकों ने शिक्षा विभाग में अपने मदरसे बंद करने का आवेदन दे दिया है। इन मदरसों में छात्र संख्या न के बराबर थी, लेकिन मिड-डे-मील का पूरा भुगतान डकारा जा रहा था। आशंका है कि अचानक कम हुए 12 हजार छात्र इन्हीं फर्जीवाड़े वाले मदरसों से जुड़े हो सकते हैं।

​जांच के लिए बनी 4 सदस्यीय कमेटी

​मदरसों में मिले इस बड़े झोल के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में शामिल हैं:

​एसडीएम (SDM) – अध्यक्ष

​जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)

​जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO)

​जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

​क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

​”131 मदरसों की जांच में 23 में गड़बड़ी मिलने पर ‘पीएम पोषण योजना’ (मिड-डे-मील) पर रोक लगा दी गई थी। इनमें से 11 संचालकों ने खुद ही योजना बंद करने की एप्लीकेशन दी थी। मार्च और अप्रैल के आंकड़ों में करीब 10 से 12 हजार बच्चों की संख्या कम दर्ज हुई है। हालांकि, अमूमन सत्र बदलने पर छात्र संख्या घटती है जो जुलाई तक सामान्य होती है, लेकिन इतनी बड़ी गिरावट संदेहास्पद है। डीएम के निर्देश पर गठित कमेटी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

— अमित कुमार चंद, जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक), हरिद्वार

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