उत्तराखंड

उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ईंधन और संसाधन बचाने के लिए हर शुक्रवार को ‘वर्चुअल सुनवाई’ अनिवार्य, पीएम मोदी की अपील का दिखा असर

उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ईंधन और संसाधन बचाने के लिए हर शुक्रवार को ‘वर्चुअल सुनवाई’ अनिवार्य, पीएम मोदी की अपील का दिखा असर

​नैनीताल: देश के मूल्यवान प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने एक बेहद अनूठी और ऐतिहासिक पहल की है। मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी एक आधिकारिक कार्यालय आदेश के अनुसार, अब उत्तराखंड हाईकोर्ट में सभी कार्य दिवस वाले शुक्रवारों (Working Fridays) को ‘वर्चुअल सुनवाई’ (ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।

​इस क्रांतिकारी फैसले के तहत अब हर शुक्रवार को अदालत के मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी, ताकि वकीलों, अधिकारियों और याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक यात्रा न करनी पड़े।

​आउट-स्टेशन अधिवक्ताओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश

​उच्च न्यायालय ने नैनीताल शहर से बाहर यानी आउट-स्टेशन क्षेत्रों (जैसे हल्द्वानी, भवाली आदि) में रहने वाले अधिवक्ताओं के लिए विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं:

​कोर्ट ने इन सभी बाहरी अधिवक्ताओं से अनुरोध किया है कि वे केवल शुक्रवार ही नहीं, बल्कि सप्ताह के अन्य दिनों में भी बेवजह नैनीताल की यात्रा करने से बचें।

​इसके बजाय, वे हफ्ते के अन्य दिनों में भी ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल मोड (온लाइन) के माध्यम से ही अदालती कार्यवाही में शामिल हों।

​इस नियम में केवल उन्हीं मामलों में विशेष छूट दी जाएगी, जहां कोई तकनीकी दिक्कत हो और अधिवक्ता वर्चुअल माध्यम से जुड़ने में असमर्थ हों, या फिर वे पैदल अदालत आने की स्थिति में हों।

​स्थानीय स्टाफ को पैदल आने और कार-पूलिंग की सलाह

​पर्यावरण और ईंधन संरक्षण के इस अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए कोर्ट ने स्थानीय स्तर पर भी बेहद कड़े और व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:

​पैदल आने का अनुरोध: आदेश में नैनीताल शहर के भीतर ही रहने वाले सभी अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय के कर्मचारियों से शुक्रवार के दिन पैदल ही हाईकोर्ट आने का विशेष अनुरोध किया गया है।

​कार-पूलिंग की व्यवस्था: बाहर से आने वाले अन्य कर्मियों और वकीलों को सख्त सलाह दी गई है कि वे अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों (Personal Cars) से अकेले आने के बजाय ‘कार-पूलिंग’ (गाड़ी साझा करने) की व्यवस्था को अपनाएं, ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो और सामूहिक प्रयासों से ईंधन बचाया जा सके।

​पीएम मोदी के ‘ईंधन बचाओ’ आह्वान का असर

​उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से की गई एक खास अपील से प्रेरित नजर आता है। बीते दिनों पीएम मोदी ने देश में ईंधन की भारी खपत को कम करने और कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए लोगों से ईंधन संरक्षण की अपील की थी।

​पीएम मोदी ने आम जनता के साथ-साथ सभी सरकारी कर्मचारियों से यह आह्वान किया था कि वे हफ्ते में कम से कम एक दिन व्यक्तिगत वाहनों को छोड़कर साइकिल, मेट्रो या कार-पूलिंग का उपयोग जरूर करें। प्रधानमंत्री के इसी आह्वान का असर अब देश के न्यायपालिका स्तंभ पर भी साफ दिखने लगा है, जहां उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस दिशा में देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।

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