केरल में राजनीतिक गतिरोध समाप्त: मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने किया विभागों का बंटवारा, मंत्रिमंडल में नए चेहरों और महिलाओं को तरजीह
केरल में राजनीतिक गतिरोध समाप्त: मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने किया विभागों का बंटवारा, मंत्रिमंडल में नए चेहरों और महिलाओं को तरजीह
तिरुवनंतपुरम: कई दिनों की राजनीतिक खींचतान, गहन विचार-विमर्श और अनिश्चितता के माहौल के बाद केरल में आखिरकार बुधवार को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली 21 सदस्यीय यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार में विभागों का बंटवारा पूरा हो गया। इस फैसले के साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की औपचारिक शुरुआत हो गई है। गौरतलब है कि केरल में आखिरी बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार साल 2011 में ओम्मन चांडी के अगुवाई में सत्ता में आई थी।
कैबिनेट में दिखा पीढ़ीगत बदलाव, 14 नए चेहरे शामिल
नई कैबिनेट में कांग्रेस और यूडीएफ के भीतर एक बड़ा पीढ़ीगत बदलाव साफ नजर आ रहा है। गठबंधन ने अपनी युवा और नई नेतृत्व छवि पेश करने की कोशिश के तहत बड़ी संख्या में नए चेहरों को पहली बार मंत्री बनाया है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन सहित कैबिनेट के 14 सदस्य पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिनमें से छह नेता तो पहली बार ही विधायक चुने गए हैं।
केरल की हालिया राजनीतिक परंपरा में पहली बार कांग्रेस ने कैबिनेट में दो महिला मंत्रियों को भी शामिल किया है। इनमें कांग्रेस नेता बिंदु कृष्णा को श्रम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पलक्कड़ से कांग्रेस सांसद वी.के. श्रीकंदन की पत्नी के.ए. तुलसी को अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है। इसके अलावा, एक और नए चेहरे एम. लिजू को आबकारी और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा मिला है।
मत्स्य पालन और स्वास्थ्य विभाग को लेकर रहा भारी विवाद
विभागों के आवंटन का अंतिम फैसला कई दिनों की मैराथन बैठकों, गुटबाजी और सहयोगी दलों के भारी दबाव के बाद ही संभव हो सका। सबसे ज्यादा विवाद मत्स्य पालन विभाग को लेकर हुआ, जिसे आखिरकार इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को दिया गया।
लैटिन कैथोलिक चर्च ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया था। चर्च की मांग थी कि यह विभाग कांग्रेस के पास ही रहना चाहिए क्योंकि तटीय समुदाय को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। हालांकि, मुस्लिम लीग अपने रुख पर अड़ी रही। पार्टी का कहना था कि यदि मत्स्य विभाग वापस लिया जाता है, तो बदले में उसे उच्च शिक्षा विभाग दिया जाए। कांग्रेस नेतृत्व और चर्च के विरोध के बावजूद अंततः यूडीएफ ने मत्स्य विभाग मुस्लिम लीग के पास ही रहने दिया और वी.ई. अब्दुल गफूर को इसका मंत्री बनाया गया।
वहीं, कांग्रेस के अंदरूनी गुटीय समीकरण भी देरी की बड़ी वजह बने। स्वास्थ्य विभाग को लेकर के. मुरलीधरन और ए.पी. अनिल कुमार के बीच लंबी खींचतान चली। अंततः मुरलीधरन को स्वास्थ्य और देवस्वम विभाग दिया गया, जबकि अनिल कुमार को राजस्व विभाग से संतोष करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे अहम विभाग, रमेश चेन्निथला को गृह मंत्रालय
पुरानी परंपरा से हटकर मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने वित्त, कानून, सामान्य प्रशासन और बंदरगाह विभाग अपने पास ही रखे हैं। दूसरी तरफ, राज्य के गृह और सतर्कता विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला को सौंपी गई है।
अन्य प्रमुख विभागों में पी.के. कुन्हालीकुट्टी को उद्योग और आईटी, पी.सी. विष्णुनाथ को पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा तथा के.एम. शाजी को स्थानीय स्वशासन विभाग का कार्यभार मिला है।
माकपा के बागी नेता जी. सुधाकरण बने प्रोटेम स्पीकर
इस सियासी हलचल के बीच, माकपा के बागी नेता जी. सुधाकरण ने बुधवार को केरल विधानसभा के 16वें कार्यकाल के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली। सुधाकरण इस बार यूडीएफ के समर्थन से अंबालापुझा सीट से निर्वाचित हुए हैं। उन्हें राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर ने शपथ दिलाई। गुरुवार को होने वाले विशेष सत्र में राज्य के सभी नवनिर्वाचित विधायक प्रोटेम स्पीकर जी. सुधाकरण की मौजूदगी में ही सदन की सदस्यता की शपथ लेंगे।
