राजनीति

तमिलनाडु में बड़ा सियासी फेरबदल: सीएम सी. जोसेफ विजय की कैबिनेट का विस्तार, 59 साल बाद सीधे सत्ता में साझीदार बनेगी कांग्रेस

तमिलनाडु में बड़ा सियासी फेरबदल: सीएम सी. जोसेफ विजय की कैबिनेट का विस्तार, 59 साल बाद सीधे सत्ता में साझीदार बनेगी कांग्रेस

​चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नए और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेट्ट्री कड़गम’ (TVK) सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है, जिसमें कांग्रेस औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फैसले के साथ ही द्रविड़ दलों के वर्चस्व वाले इस राज्य में करीब 59 साल (लगभग छह दशक) बाद कांग्रेस सीधे सत्ता में भागीदारी करने जा रही है।

​अंतिम दौर की बातचीत और दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुए ‘पावर-शेयरिंग’ समझौते के बाद कांग्रेस ने कैबिनेट में शामिल होने वाले अपने दोनों मंत्रियों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

​कांग्रेस के ये दो विधायक लेंगे मंत्री पद की शपथ

​कांग्रेस आलाकमान और पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु कैबिनेट में कांग्रेस के दो प्रमुख चेहरों को जगह दी गई है:

​एडवोकेट राजेश कुमार (राजेश कुमार के.) – विधानसभा में कांग्रेस के फ्लोर लीडर और किल्लियूर सीट से विधायक।

​थिरु पी. विश्वनाथन – मेलूर सीट से निर्वाचित कांग्रेस विधायक।

​दोनों नेता आज सुबह लोक भवन में आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में कैबिनेट मंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इस समारोह में हिस्सा लेने के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर चेन्नई पहुंच चुके हैं।

​59 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी: क्यों है यह ऐतिहासिक?

​तमिलनाडु की सियासत में कांग्रेस की यह एंट्री कई मायनों में बेहद खास और ऐतिहासिक मानी जा रही है:

​1967 के बाद पहली बार: तमिलनाडु में कांग्रेस आखिरी बार सीधे सरकार का हिस्सा साल 1967 (1960 का दशक) से पहले रही थी। उसके बाद से राज्य में मुख्य रूप से द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) का ही दबदबा रहा।

​समर्थन से सीधे सरकार तक: कांग्रेस लंबे समय तक राज्य में द्रमुक (DMK) की सहयोगी रही और पिछली सरकारों को बाहर से समर्थन भी दिया, लेकिन वह कभी सरकार के भीतर शामिल नहीं हुई।

​बदले समीकरण: हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने द्रमुक के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था और 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, नतीजों के बाद राज्य में टीवीके (TVK) सबसे बड़ी पार्टी (108 सीटें) बनकर उभरी, जिसके बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को समर्थन देने का फैसला किया और अब वह सरकार का हिस्सा बनने जा रही है।

​अन्य सहयोगियों को भी सरकार में शामिल होने का न्योता

​मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मंशा केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अपने अन्य सहयोगी दलों को भी मंत्रिपरिषद में शामिल कर एक मजबूत और स्थिर गठबंधन सरकार चलाने की है।

​टीवीके के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री आधव अर्जुना ने बताया कि मुख्यमंत्री की इच्छा है कि वीसीके (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन भी मंत्रिपरिषद का हिस्सा बनें। इसके अलावा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को भी सरकार में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया गया है, और इस संबंध में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लगातार बातचीत चल रही है। वर्तमान में विजय सरकार को कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल, सीपीआई और सीपीआईएम का समर्थन हासिल है।

​राजनीतिक मायने: 2026 और दक्षिण की राजनीति में बड़ा बदलाव

​इस कैबिनेट विस्तार के दूरगामी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री जोसेफ विजय खाली पड़े महत्वपूर्ण विभागों (जैसे कृषि, उच्च शिक्षा और राजस्व) को भरकर अपनी नई सरकार को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से स्थिर करना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे दक्षिण भारत में अपनी खोई हुई पकड़ को दोबारा मजबूत करने के एक बड़े और सुनहरे अवसर के रूप में देख रही है। इस नए गठबंधन से राज्य की पारंपरिक द्रमुक-अन्नाद्रमुक की राजनीति को एक कड़ी चुनौती मिलने के आसार हैं।

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