अडानी को अमेरिकी कोर्ट से मिली राहत: जानें पूरा मामला
अडानी को अमेरिकी कोर्ट से मिली राहत: जानें पूरा मामला
न्यूयॉर्क, 19 मई 2026: गौतम अडानी और अडानी ग्रुप को अमेरिका में एक बड़े कानूनी संकट से राहत मिल गई है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अन्य के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी (criminal fraud) के मामले को ड्रॉप करने का फैसला किया है। इसके साथ ही US SEC (Securities and Exchange Commission) के सिविल फ्रॉड मामले में भी सेटलमेंट हो गया है।
मामला क्या था?
2024 में शुरू हुआ मामला: नवंबर 2024 में अमेरिकी DOJ ने गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के अधिकारियों पर $250 मिलियन (लगभग ₹2,100 करोड़) की रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था।
आरोप: अडानी ग्रुप ने भारत में बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स (लगभग $6 बिलियन के) हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी। इस रिश्वतखोरी को छिपाकर अमेरिकी निवेशकों से बांड जारी करके पैसे जुटाए गए, जिससे निवेशकों को गुमराह किया गया।
इसमें securities fraud (प्रतिभूति धोखाधड़ी) और wire fraud के आरोप लगे थे।
यह मामला हिंदेनबर्ग रिपोर्ट (2023) के बाद की जांच से जुड़ा था, लेकिन मुख्य फोकस सोलर प्रोजेक्ट्स में कथित ब्राइबरी पर था।
अब क्या राहत मिली?
SEC सिविल केस: अडानी ने बिना किसी गलती स्वीकार किए सेटलमेंट कर लिया। गौतम अडानी को $6 मिलियन और सागर अडानी को $12 मिलियन (कुल $18 मिलियन) का सिविल पेनल्टी भरना पड़ेगा। अदालत की मंजूरी के बाद केस सुलझ गया।
DOJ क्रिमिनल केस: अमेरिकी न्याय विभाग ने सभी आपराधिक आरोप वापस लेने का फैसला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, DOJ ने आगे संसाधन लगाने का कोई फायदा नहीं देखा और केस ड्रॉप कर दिया।418f37
अडानी ग्रुप ने हमेशा सभी आरोपों से इनकार किया है और इसे बेबुनियाद बताया।
क्यों मिली राहत?
अडानी पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि मामला अमेरिकी अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) में नहीं आता, क्योंकि मुख्य घटनाएं भारत में हुईं और अमेरिकी निवेशकों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
कुछ रिपोर्ट्स में $10 बिलियन के अमेरिका निवेश प्रस्ताव का भी जिक्र है, जिसने डील में मदद की हो सकती है।
अप्रैल 2026 में US कोर्ट ने अडानी की याचिका पर सुनवाई की अनुमति दी थी, जो राहत की दिशा में पहला बड़ा कदम था।
यह राहत अडानी ग्रुप के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है। इसके बाद ग्रुप के शेयरों में तेजी आई और वैश्विक विस्तार योजनाओं को बल मिला है। हालांकि, भारत में SEBI आदि की कुछ जांचें अभी भी जारी हैं।
यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े कारोबारियों के खिलाफ ऐसे मामले कितने जटिल और लंबे चल सकते हैं।
