राजनीति

‘जितने मुस्लिम हैं, पहले सब हिंदू थे’, राजा भैया के बयान पर मचा सियासी बवाल

‘जितने मुस्लिम हैं, पहले सब हिंदू थे’, राजा भैया के बयान पर मचा सियासी बवाल

प्रतापगढ़/लखनऊ, 19 मई 2026: जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के एक विवादित बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। प्रतापगढ़ के कुंडा में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान राजा भैया ने कहा, “आज जितने मुस्लिम हैं, वे पहले हिंदू ही थे। ये अरब से नहीं आए हैं। जो लोग आस्था विहीन, कायर और दबाव में थे, उन्होंने धर्म परिवर्तन किया। जबकि वीर और बलिदानी लोग अपने धर्म पर कायम रहे।”

यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और विपक्षी दलों समेत मुस्लिम संगठनों ने इसकी तीखी निंदा की है।

बयान का पूरा संदर्भ

राजा भैया ने आगे कहा कि सनातन धर्म कमजोर हुआ तो संविधान भी नहीं बचेगा। उन्होंने दावा किया कि भारत हिंदू बहुल होने के कारण ही सेकुलर है। बयान के साथ “जो कायर थे, वह मुस्लिम बन गए” जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल हुआ, जिसने विवाद को और भड़का दिया।

प्रतिक्रियाएं

मुस्लिम संगठनों का पलटवार: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि लोगों ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया। उन्होंने राजा भैया के बयान को सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने वाला बताया।

विपक्षी दलों की आलोचना: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे सांप्रदायिक बयान करार दिया। सपा नेता ने कहा कि ऐसे बयान समाज को बांटने का काम करते हैं और प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।

BJP की चुप्पी: भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ नेताओं ने इसे “ऐतिहासिक सत्य” बताने की कोशिश की।

राजा भैया की छवि

बाहुबली छवि वाले राजा भैया अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। कुंडा से विधायक के रूप में वे लगातार सनातन धर्म और हिंदुत्व पर अपनी राय रखते आए हैं।

सियासी माहौल

यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच यह बयान राजनीतिक तापमान को और बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं।

राजा भैया पर अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई की खबर नहीं है, लेकिन विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि प्रशासन इस मामले में संज्ञान ले।

यह विवाद दिखाता है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में धार्मिक मुद्दे अभी भी कितनी आसानी से गरमा सकते हैं।

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