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एयर इंडिया का बड़ा फैसला: ईंधन की बढ़ती कीमतों और वित्तीय संकट के बीच 100 उड़ानें रद्द

एयर इंडिया का बड़ा फैसला: ईंधन की बढ़ती कीमतों और वित्तीय संकट के बीच 100 उड़ानें रद्द

​मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके परिणामस्वरूप, एयर इंडिया ने जून की शुरुआत से अगले तीन महीनों के लिए अपनी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को निलंबित या कम करने का निर्णय लिया है।

​1. प्रमुख उड़ानें और प्रभावित रूट्स

​एयरलाइन ने परिचालन लागत को नियंत्रित करने के लिए अपने नेटवर्क में बड़े बदलाव किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 100 उड़ानों की कटौती की गई है।

​पूर्णतः निलंबित (अस्थायी रूप से बंद):

​दिल्ली से शिकागो और दिल्ली से शंघाई।

​चेन्नई-सिंगापुर, मुंबई-ढाका और दिल्ली-माले (अगस्त तक बंद)।

​उड़ानों की संख्या में कटौती (Reduced Frequency):

​दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, वैंकूवर, पेरिस, सिंगापुर, बैंकॉक और कुआलालंपुर।

​दिल्ली-मेलबर्न और दिल्ली-सिडनी की उड़ानें 7 से घटाकर 4 कर दी गई हैं।

​अपवाद: कुछ चुनिंदा रूट्स जैसे मुंबई-नेवार्क पर उड़ानों की संख्या बढ़ाई गई है।

​2. अनुशासन पर सख्त कार्रवाई: 1,000 कर्मचारी बर्खास्त

​वित्तीय दबाव के बीच एयर इंडिया ने अपने आंतरिक अनुशासन को भी कड़ा कर दिया है। सीईओ कैंपबेल विल्सन ने खुलासा किया कि पिछले तीन वर्षों में नैतिक कदाचार और नीतिगत उल्लंघनों के लिए 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है।

​बर्खास्तगी के मुख्य कारण:

​एम्प्लॉई लीजर ट्रैवल (ELT) सिस्टम का दुरुपयोग।

​विमान से सामान की तस्करी में संलिप्तता।

​बिना शुल्क लिए यात्रियों को अतिरिक्त सामान (Extra Baggage) ले जाने की अनुमति देना।

​3. भारी वित्तीय घाटा और लागत-बचत के उपाय

​एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) एक गंभीर वित्तीय दौर से गुजर रहा है।

​अनुमानित घाटा: मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में समूह को 22,000 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा होने का अनुमान है।

​बचत के कदम: टाटा समूह के पुनर्गठन प्रयासों के तहत एयरलाइन ने कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) रोक दी है और गैर-जरूरी खर्चों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

​सीईओ का बयान: कैंपबेल विल्सन के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन की अस्थिर कीमतों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में यह कटौती एयरलाइन के अस्तित्व और भविष्य के सुधारों के लिए आवश्यक है।

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