राजनीति

AIADMK में बड़ी टूट: फ्लोर टेस्ट के बाद दिग्गज नेताओं पर गिरी गाज

AIADMK में बड़ी टूट: फ्लोर टेस्ट के बाद दिग्गज नेताओं पर गिरी गाज

​तमिलनाडु की राजनीति में आज उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब विधानसभा में हुए फ्लोट टेस्ट के दौरान AIADMK (अन्नाद्रमुक) के कई प्रमुख विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर TVK के पक्ष में मतदान किया। इस कदम को अनुशासनहीनता मानते हुए पार्टी नेतृत्व ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है।

​प्रमुख नेताओं की बर्खास्तगी

​पार्टी के आधिकारिक आदेश (व्हिप) का उल्लंघन करने के आरोप में AIADMK ने अपने कई दिग्गज चेहरों को पदों से मुक्त कर दिया है। इसमें शामिल मुख्य नाम हैं:

​सी. वी. शनमुगम

​एस. पी. वेलुमणि

​सी. विजयबास्कर

​पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई संगठन की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए अनिवार्य थी।

​सी. वी. शनमुगम का पलटवार: “असली विश्वासघाती कौन?”

​पदों से हटाए जाने के बाद विधायक सी. वी. शनमुगम ने पार्टी महासचिव ई. पलानीसामी (EPS) पर तीखा हमला बोला है। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

​सिद्धांतों से समझौता: शनमुगम ने आरोप लगाया कि EPS मुख्यमंत्री बनने के लालच में पार्टी के मूल सिद्धांतों (DMK का विरोध) को भूल चुके हैं।

​अम्मा का अपमान: उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस DMK के झूठे मुकदमों के कारण ‘अम्मा’ (जयललिता) को जेल जाना पड़ा और अंततः उन्हें खोना पड़ा, EPS आज सत्ता के लिए उसी विचारधारा के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं।

​एकजुटता की मांग: उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी को मजबूत करने के लिए पुराने और निष्कासित नेताओं को वापस लिया जाए, लेकिन नेतृत्व की हठधर्मिता इसमें बाधा बनी हुई है।

​पार्टी के भीतर दो फाड़

​आज के घटनाक्रम ने AIADMK के भीतर की गहरी दरार को उजागर कर दिया है:

​विद्रोही गुट: वेलुमणि और शनमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर सरकार/TVK का समर्थन किया।

​EPS गुट: पलानीसामी के प्रति निष्ठा रखने वाले विधायकों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया।

​दलबदल विरोधी कानून का खतरा:

AIADMK नेतृत्व ने पहले ही चेतावनी दी है कि जिन विधायकों ने आधिकारिक व्हिप का उल्लंघन किया है, उन पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो सकती है।

​निष्कर्ष:

यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK के भविष्य और ई. पलानीसामी की पकड़ पर बड़े सवाल खड़े करता है। दिग्गजों की यह बगावत आगामी चुनावों में पार्टी की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है।

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