’एक वोट’ का संग्राम: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे TVK विधायक सेतुपति, मद्रास HC के वोटिंग पर रोक वाले आदेश को दी चुनौती
तमिलनाडु की सियासत में ‘एक वोट’ की जंग अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर पहुंच गई है। टीवीके (TVK) विधायक आर. श्रीनिवासा सेतुपति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।
’एक वोट’ का संग्राम: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे TVK विधायक सेतुपति, मद्रास HC के वोटिंग पर रोक वाले आदेश को दी चुनौती
नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में कानूनी दांवपेंच तेज हो गए हैं। शिवगंगा जिले की तिरुप्पत्तूर सीट से महज 1 वोट से जीत दर्ज करने वाले टीवीके (TVK) विधायक आर. श्रीनिवासा सेतुपति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सेतुपति ने मद्रास उच्च न्यायालय (HC) के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें विधानसभा में किसी भी फ्लोर टेस्ट (बहुमत परीक्षण) के दौरान मतदान करने से रोक दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में कल होगी अहम सुनवाई
अभिषेक मनु सिंघवी ने की पैरवी: सेतुपति की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने मामले को रखा और जल्द सुनवाई की मांग की।
CJI का फैसला: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर कल (बुधवार) सुनवाई करने की सहमति जताई है।
क्या है पूरा विवाद?
ऐतिहासिक करीबी मुकाबला: विधानसभा चुनाव में टीवीके उम्मीदवार श्रीनिवासा सेतुपति को 83,365 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और डीएमके (DMK) नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट प्राप्त हुए।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: पेरियाकरुप्पन ने मतों की पुनर्गणना (Recounting) की मांग करते हुए मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि डाक मतपत्रों (Postel Ballots) की हेराफेरी हुई है।
वोटिंग राइट्स पर रोक: मद्रास हाईकोर्ट ने मुख्य याचिका पर सुनवाई (20 मई) होने तक सेतुपति को सदन में मतदान करने से रोक दिया है, हालांकि उनकी जीत को फिलहाल रद्द नहीं किया गया है।
DMK नेता पेरियाकरुप्पन की मांगें
डीएमके नेता ने अदालत से मांग की है कि:
तिरुप्पत्तूर सीट के डाक मतपत्रों को सुरक्षित रखा जाए।
मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग अदालत में पेश की जाए।
डाक मतपत्रों को शामिल कर फिर से वोटों की गिनती की जाए।
विजय सरकार के लिए क्यों अहम है यह मामला?
थलापति विजय की सरकार वर्तमान में सहयोगियों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में एक-एक विधायक का वोट ‘फ्लोर टेस्ट’ के दौरान बेहद कीमती है। अगर सुप्रीम कोर्ट सेतुपति को राहत नहीं देता है, तो सदन में शक्ति प्रदर्शन के दौरान टीवीके के लिए समीकरण चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
कल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर न केवल सेतुपति, बल्कि पूरी तमिलनाडु सरकार और विपक्ष की नजरें टिकी होंगी।
