उत्तराखंड

​चंपावत केस का सच: गैंगरेप नहीं, निर्दोषों को फंसाने की रची गई थी बड़ी साजिश

चंपावत के चर्चित कथित गैंगरेप मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। पुलिस की जांच और अब पीड़िता व उसके भाई के वीडियो सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि यह पूरा मामला तीन निर्दोष लोगों को फंसाने की एक गहरी साजिश थी।

​चंपावत केस का सच: गैंगरेप नहीं, निर्दोषों को फंसाने की रची गई थी बड़ी साजिश

​पुलिस द्वारा मामले का पर्दाफाश किए जाने के बाद अब पीड़िता और उसके चचेरे भाई के दो चौंकाने वाले वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो ने साजिशकर्ता कमल रावत के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।

​पीड़िता का बयान: “कमल रावत के इशारे पर रची कहानी”

​सामने आए वीडियो में पीड़िता ने खुद स्वीकार किया है कि उसके साथ कोई गलत घटना या गैंगरेप नहीं हुआ है। पीड़िता के खुलासे इस प्रकार हैं:

​झूठी स्थिति बनाना: कमल रावत की योजना थी कि आरोपियों (जिन्हें बाद में पुलिस ने निर्दोष पाया) के कमरे में गैंगरेप जैसी स्थिति बनाई जाए ताकि उन्हें कानूनी रूप से फंसाया जा सके।

​साजिशकर्ता: पीड़िता ने कमल रावत और उसकी एक महिला मित्र पर उसे मोहरा बनाने और साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है।

​स्वेच्छा से बयान: पीड़िता ने वीडियो में स्पष्ट किया कि वह बिना किसी दबाव के और पूरे होश में यह सच बता रही है।

​50 लाख के समझौते का सच: भाई ने खोली पोल

​पीड़िता के चचेरे भाई का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उसने पहले लगाए गए ’50 लाख के ऑफर’ वाले आरोप की सच्चाई बताई:

​गुमराह करना: कमल रावत ने पीड़िता के भाई को फोन कर डराया कि उसकी बहन पुलिस हिरासत में है और चाचा लापता हैं।

​झूठे आरोप लगवाना: कमल रावत ने ही भाई से कहा कि आरोपी पक्ष 50 लाख रुपये का लालच दे रहा है। उसने भाई को एक टेक्स्ट लिखकर भेजा, जिसे भाई ने बिना सोचे-समझे पुलिस अधीक्षक (SP) को मैसेज कर दिया।

​सच्चाई का पता चलना: जब भाई की अपने चाचा से बात हुई, तब उसे अहसास हुआ कि कमल रावत पिछले कई महीनों से इलाज के नाम पर उनके परिवार का भरोसा जीतकर यह साजिश रच रहा था। भाई ने अब पुलिस और निर्दोष बताए गए लोगों से माफी मांगी है।

​एक नज़र में पूरा घटनाक्रम: क्या था मामला?

​शुरुआती शिकायत: नाबालिग के पिता ने पुलिस को बताया था कि 5 मई को उनकी बेटी सहेली की शादी में गई थी और बाद में वह एक कमरे में बंधी हुई हालत में मिली, जहाँ उसने गैंगरेप का आरोप लगाया।

​पुलिस की जांच (7 मई): पुलिस ने गहन जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर साफ किया कि नाबालिग के साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ और न ही शरीर पर चोट के कोई निशान मिले।

​साजिश का खुलासा: जांच में पाया गया कि कमल रावत और उसकी सहेली ने नाबालिग को अपने जाल में फंसाकर तीनों लोगों पर झूठा मुकदमा दर्ज करवाया था।

​कौन है साजिशकर्ता कमल रावत?

​रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता कमल रावत का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। वर्ष 2023 में भी उस पर एक नाबालिग से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था, हालांकि उस मामले में वह हाईकोर्ट से बरी हो चुका है।

​निष्कर्ष: इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किस तरह सोशल मीडिया और कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर निर्दोषों को फंसाने की कोशिश की गई। पुलिस अब इस साजिश के पीछे के मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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