मई 2026 में गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग: तिथि, शुभ मुहूर्त और विशेष नियम
मई का महीना शिव भक्तों के लिए विशेष होने वाला है, क्योंकि इसमें दो ‘गुरु प्रदोष व्रत’ का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार को पड़ती है, तो वह गुरु प्रदोष कहलाता है। मई 2026 में यह शुभ योग दो बार बन रहा है:
1. पहला प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)
तारीख: 14 मई 2026 (गुरुवार)
पूजा का समय: शाम 05:22 से शाम 07:04 तक।
महत्व: यह व्रत वैशाख मास के समापन और ज्येष्ठ की शुरुआत के संधि काल में मानसिक शांति के लिए उत्तम है।
2. दूसरा प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष)
तारीख: 28 मई 2026 (गुरुवार)
पूजा का समय: प्रदोष काल (शाम के समय)।
महत्व: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष का यह व्रत शत्रुओं पर विजय और सफलता प्राप्ति के लिए विशेष माना जाता है।
प्रदोष व्रत: सफलता के 5 सुनहरे नियम
यदि आप यह व्रत रख रहे हैं, तो इन नियमों का पालन आपकी पूजा को और भी फलदायी बनाएगा:
प्रदोष काल की प्रधानता: याद रखें, शिव जी की मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद ही करें, क्योंकि इसी समय महादेव प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं।
सात्विकता: केवल फलहार या बिना नमक का सात्विक भोजन ग्रहण करें।
शुद्ध आचरण: मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध न लाएं।
दान का फल: गुरुवार का दिन होने के कारण चने की दाल या पीले फलों का दान अति शुभ होगा।
मंत्र शक्ति: पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप निरंतर करते रहें।
एक छोटी सी सलाह: बड़ा व्रत 14 मई को है। अपनी पूजा सामग्री (बेलपत्र, धतूरा, पीला चंदन) की तैयारी पहले से कर लेना अच्छा रहेगा।
