राष्ट्रीय

दुनिया के प्रमुख जलवायु वैज्ञानिक James Hansen की चेतावनी: 2026 बन सकता है रिकॉर्ड का सबसे गर्म वर्ष

दुनिया के प्रमुख जलवायु वैज्ञानिक James Hansen की चेतावनी: 2026 बन सकता है रिकॉर्ड का सबसे गर्म वर्ष

नई दिल्ली/कोलंबिया: पृथ्वी के तापमान में लगातार हो रही वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर दुनिया के प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक जेम्स हansen ने एक बड़ी भविष्यवाणी की है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हansen, जिन्हें अक्सर जलवायु विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है, ने कहा है कि 2026 मानव इतिहास का सबसे गर्म वर्ष साबित हो सकता है।

सुपर एल नीनो और मानव-प्रेरित गर्मी का मिला प्रभाव

हansen और उनकी टीम की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के दूसरे हिस्से में एक शक्तिशाली सुपर एल नीनो घटना की संभावना है। यह घटना प्राकृतिक रूप से तापमान बढ़ाती है, जिसके साथ-साथ मानव गतिविधियों से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव मिलकर रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पैदा कर सकता है।

उन्होंने अनुमान लगाया है कि 2026 का औसत तापमान 2024 (जो वर्तमान में सबसे गर्म वर्ष माना जा रहा है) से भी आगे निकल सकता है। टीम ने यह भी जोड़ा कि 2027 इसमें और भी गर्म हो सकता है।

वैज्ञानिक आधार

एल नीनो का प्रभाव: एल नीनो महासागरीय धाराओं में बदलाव लाता है, जो वैश्विक तापमान को अस्थायी रूप से बढ़ा देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह 2026 में चरम पर पहुंच सकता है।

जलवायु परिवर्तन: कार्बन उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी का बेसलाइन तापमान पहले से ही ऊंचा है।

अन्य संगठनों जैसे Environment and Climate Change Canada (ECCC) ने भी पूर्वानुमान दिया है कि 2026 टॉप-4 सबसे गर्म वर्षों में से एक होगा।

भारत और विश्व पर संभावित प्रभाव

भारत में: वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि सुपर एल नीनो के कारण भारत में हीटवेव बढ़ सकती हैं, मानसून कमजोर हो सकता है, सूखा पड़ सकता है और कृषि प्रभावित हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर: चरम मौसम घटनाएं जैसे भीषण गर्मी, जंगल की आग, बाढ़ और सूखा बढ़ने की आशंका है।

जेम्स हansen 1988 में अमेरिकी कांग्रेस को जलवायु परिवर्तन की चेतावनी देने वाले पहले प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक थे। उनकी यह नई भविष्यवाणी जलवायु संकट को और गंभीरता से लेने की अपील करती है।

नोट: हालांकि कई वैज्ञानिक 2026 को रिकॉर्ड ब्रेकिंग मान रहे हैं, लेकिन अंतिम परिणाम मौसम पैटर्न पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उत्सर्जन कम करने और अनुकूलन रणनीतियों पर तुरंत काम किया जाए।

यह खबर विभिन्न वैज्ञानिक रिपोर्ट्स और न्यूज एजेंसियों पर आधारित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *